स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ पड़ा भारी, 3 वाहन सीज; 15 के चालान

स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ पड़ा भारी, 3 वाहन सीज; 15 के चालान

‘मिशन सेफ फ्यूचर 3.0’ में परिवहन विभाग की ताबड़तोड़ कार्रवाई, नियम तोड़ने वाले स्कूलों और वाहन संचालकों को कड़ी चेतावनी

मथुरा, 14 सितंबर। स्कूली बच्चों, खासकर छात्राओं की सुरक्षा से खिलवाड़ अब भारी पड़ेगा। स्कूली वाहनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले स्कूल प्रबंधन और वाहन संचालकों के खिलाफ परिवहन विभाग ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सोमवार से शुरू हुए छह दिवसीय विशेष अभियान ‘मिशन सेफ फ्यूचर 3.0’ के तहत एआरटीओ प्रवर्तन टीम ने औचक कार्रवाई करते हुए नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले तीन स्कूली वाहनों को सीज कर दिया, जबकि 15 अन्य वाहनों के चालान किए गए।

वरिष्ठ सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन राजेश राजपूत ने बताया कि माननीय उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ द्वारा जनहित याचिका संख्या 3436/2020 में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश दिए गए हैं। परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश के निर्देश पर 14 से 19 सितंबर तक अभियान चलाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य स्कूली छात्र-छात्राओं के सुरक्षित आवागमन के साथ वाहनों में निर्धारित सुरक्षा मानकों का शत-प्रतिशत पालन कराना है।

स्कूलों में परिवहन सुरक्षा समिति बनाना अनिवार्य

उत्तर प्रदेश मोटरयान (26वां संशोधन) नियमावली, 2019 के नियम 222-ग के तहत प्रत्येक मान्यता प्राप्त विद्यालय में ‘विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति’ का गठन अनिवार्य है। जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से सभी विद्यालयों में समिति का शत-प्रतिशत गठन सुनिश्चित कराया जाएगा। समिति में संबंधित विद्यालय के प्राधिकारी के अलावा जिलाधिकारी द्वारा नामित अधिकारी, प्रबंधक प्रतिनिधि, थानाध्यक्ष, बीएसए और डीआईओएस द्वारा नामित अधिकारी, वाहन ऑपरेटर तथा स्थानीय निकाय के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति की बैठक वर्ष में चार बार जुलाई, अक्टूबर, जनवरी और अप्रैल में होगी।

बस में छात्राएं तो महिला परिचर और शिक्षक जरूरी

नियम 222-ठ के तहत प्रत्येक स्कूली वाहन में चालक के अलावा एक परिचर अनिवार्य है। छात्राओं के आवागमन वाली बस में परिचर महिला होना जरूरी है। ऐसी बस में एक शिक्षक या शिक्षिका की मौजूदगी भी अनिवार्य है। इसके अलावा वाहन चलाने वाले प्रत्येक चालक का पूर्ण पुलिस सत्यापन कराया जाना भी जरूरी है।

परिवहन विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अभियान के पहले ही दिन तीन वाहनों का सीज होना और 15 के चालान होना स्कूल संचालकों के लिए साफ चेतावनी है कि नियमों की अनदेखी अब कार्रवाई को न्योता देगी।

राजेश राजपूत ने विद्यालय प्रबंधन और वाहन स्वामियों को चेतावनी दी कि वे तत्काल विद्यालय परिवहन सुरक्षा समिति का गठन कर सभी निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करें। चेकिंग अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। नियमों का उल्लंघन मिला तो संबंधित विद्यालय और वाहन के खिलाफ इससे भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।