मथुरा। तहसील महावन क्षेत्र के मौजा गोकुल बांगर में करोड़ों रुपये कीमत की सरकारी जमीन के अभिलेखों में हेराफेरी कर उसे निजी नाम दर्ज किए जाने का मामला सामने आया है। मामला खसरा संख्या 44 और 45 की जमीन से जुड़ा बताया जा रहा है। गोकुल बैराज के समीप स्थित होने के कारण जमीन की कीमत करोड़ों रुपये में आंकी जा रही है। आरोप है कि सरकारी अभिलेखों में कथित हेराफेरी और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जमीन को निजी व्यक्ति के नाम दर्ज कराने का प्रयास किया गया।
मामले में तत्कालीन एसडीएम कंचन गुप्ता और तहसीलदार अमित त्रिपाठी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि जिस जमीन का स्वरूप सरकारी था, उसके अभिलेखों में बदलाव किस आधार पर और किन परिस्थितियों में किया गया, इसकी जांच आवश्यक है। खास तौर पर यह सवाल उठ रहा है कि ग्राम प्रधान के पति ओमेंद्र सिंह ने अपने पिता बनवारी के नाम सरकारी जमीन कैसे दर्ज करा दी।
स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि जमीन सरकारी थी तो उसके निजी नाम दर्ज होने के पीछे कौन से दस्तावेज आधार बने? अभिलेखों में बदलाव किस स्तर पर हुआ और संबंधित अधिकारियों ने उस समय इसकी जांच क्यों नहीं की? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
आरोप यह भी है कि सरकारी जमीनों से अवैध कब्जे हटाने के बजाय राजस्व विभाग के स्तर पर ही ऐसे मामलों को संरक्षण मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसे में गोकुल बांगर की जमीन का मामला राजस्व अभिलेखों की पारदर्शिता और सरकारी भूमि की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रदेश सरकार की ओर से सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने और राजस्व अभिलेखों में पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए जाते रहे हैं। इसके बावजूद यदि सरकारी जमीन निजी नाम दर्ज हुई है तो यह पूरे राजस्व तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में अभिलेखों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाता है या नहीं। खसरा संख्या 44 और 45 से जुड़े पुराने राजस्व अभिलेख, नामांतरण की प्रक्रिया, संबंधित आदेश और कथित दस्तावेजों की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी जमीन निजी नाम किस आधार पर दर्ज हुई।
मामले की निष्पक्ष जांच होने पर यह भी सामने आ सकता है कि जमीन के अभिलेखों में बदलाव के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे और इसकी प्रक्रिया में किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका रही या नहीं।






