भक्तों का समूह आज भी ब्रज धरा के उन वनों में भटकता है, जहां भगवान श्रीकृष्ण के पाद पद्म की छाप अमिट रूप से अंकित मानी जाती है। संत पंडित श्यामानंद जी महाराज ने कहा कि ब्रजभूमि पर भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण केवल आसुरी शक्तियों के विनाश के लिए नहीं, बल्कि भक्त और अभक्त दोनों को मोक्ष का समान अवसर देने के लिए हुआ था।
संत पंडित श्यामानंद जी महाराज
उन्होंने कहा कि जब श्रीकृष्ण ने अपने पूर्ण अंश के साथ इस पवित्र भूमि पर विचरण किया, तब उनके पावन चरणों की छाप ब्रज की रज में स्थायी हो गई। वही छाप आज भक्तों के लिए आस्था और भक्ति का तीर्थ बन गई है।
देवउठनी एकादशी के अवसर पर ब्रज के बारह वनों और चौबीस उपवनों में भक्तों की टोलियां परिक्रमा के लिए निकलीं। हाथों में दंड, मुख पर श्रीकृष्ण नाम और हृदय में दर्शन की प्यास लिए ये श्रद्धालु भगवान की उन चरण रेखाओं की खोज में निकले हैं, जिनमें अनंत मुक्ति का रहस्य समाया है।
संत श्यामानंद जी महाराज ने कहा, “जिसे यह रज स्पर्श कर लेती है, उसका जीवन धन्य हो जाता है — क्योंकि यह वही धरा है जहां स्वयं श्रीकृष्ण ने अपने पाद पद्म की अमिट छाप छोड़ी थी।”