
-उत्तर भारत के विशालतम रंगनाथ मंदिर में 13 दिवसीय झूला उत्सव आरंभ
Aaditya mangal news : हरियाली तीज पर शनिवार को वृंदावन में ठाकुर बांके बिहारी जी और बरसाना में राधा रानी ने स्वर्ण-रजत झूले में विराजमान होकर अपने भक्तों को दर्शन दिए। वहीं दूसरी तरफ दक्षिण भारतीय शैली के रंगनाथ मंदिर में शनिवार शाम को भगवान गोदा रंगमन्नार चांदी के झूले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। दर्शन करने को लाखों श्रद्धालु दुनिया भर से वृंदावन और बरसाना पहुंचे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर डीएम पुलकित खरे और एसएसपी शैलेश पांडेय अधीनस्थ अधिकारियों के साथ वृंदावन में ही मौजूद रहे। मंदिर के आसपास के क्षेत्र भी भ्रमण कर दोनों आला अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लिया। ब्रज में हरियाली तीज का पर्व धूमधाम से मनाया गया। ठाकुर बांके बिहारी जी मंदिर में हरियाली तीज पर ही एक बार हिंडोला डाला जाता है। यहां ठाकुर जी को गर्भगृह से निकालकर आंगने में डाले गए झूले पर विराजमान किया गया। इस झूले में ठाकुर बांके बिहारी जी पहली बार 15 अगस्त 1947 को विराजमान हुए थे।
आज ठाकुरजी का मंदिर हरे रंग से सजाया गया। सेवायत और अन्य लोग भी हरी पोशाक पहने हुए थे। ठाकुर जी को भी हरी पोशाक धारण कराई। पूरा मंदिर हरियाली से भरा हुआ नजर आया। दरअसल, सवान महीने के शुक्ल पक्ष की तीज को ब्रज में हरियाली तीज मनाई जाती है। इसी दिन वर्ष में एक बार ठाकुर बांके बिहारी जी स्वर्ण रजत झूले में दर्शन देते हैं। वहीं दूसरी तरफ राधारानी को भी गर्भगृह से निकाल कर सफेद छतरी पर लाया गया। स्वर्ण रजत झूले में विराजमान होकर राधा रानी ने अपने भक्तों को बरसाना में दर्शन दिए। उत्तर भारत के विशाल रंगनाथ मंदिर में 13 दिवसीय झूला उत्सव शनिवार से आरंभ हसे गाया। 250 किलो से अधिक के चांदी के झूले में भगवान गोदा रंगनाथ विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। मंदिर में स्थित गरुड़ स्तंभ के पास झूला मंडप में आकर्षक बेल, पत्तियां, अंगूरों, तोता की कलाकृति से बने झूले में विराजमान होकर भगवान रंगनाथ हरियाली तीज से 13 दिन तक शाम के समय भक्तों को दर्शन देंगे। बरसाना के लाडली जी मंदिर में राधा रानी सोने के झूले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगी। इस समय मंदिर के गोस्वामी समाज के लोग गायन के जरिए झूला उत्सव मनाएंगे। पुष्टिमार्गीय संप्रदाय के द्वारिकाधीश मंदिर में भी हिंडोला उत्सव मनाया जाएगा।
-इंद्र ने भी खुशी में बरसाया जल : सावन के महीने में हर तरफ हरियाली ही हरियाली नजर आती है। वर्षा भी होती है। ब्रज के सभी मंदिरों में झूले पड़ जाते हैं। महिलाएं भी पेड़ों पर झूले डाल कर झूलती है। मल्हार गायन होता है। धार्मिक मान्यता है कि हरियाली तीज पर ही द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण ने राधारानी के साथ झूले में विराजमान होकर झूला का आनंद लिया था। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। आज भी सुबह घने बादल छा गए और वर्षा हुई। हालांकि, कुछ देर बाद मौसम साफ हो गया। धूप निकलने उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल हो गए, लेकिन मौसम की परवाह किए बिना ही भक्त अपने आराध्य के दर्शन करने के लिए लाइन में लगे रहे। भक्त पसीने से तरबतर नजर आए, लेकिन उनके उत्साह में कोई कमी न थी। वे एक झलक अपने आराध्य की पाने के लिए उतावले थे। दर्शन कर वे निहाल हो गए।
-बदला गया समय- हरियाली तीज पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के दर्शन को आगमन के मद्देनजर आज बांके बिहारी जी के दर्शन के समय में भी परिवर्तन किया गया। सुबह 7:45 बजे से दोपहर 2 बजे तक ठाकुर जी ने दर्शन हुए और उसके बाद शाम पांच बजे से लेकर रात 11 बजे तक दर्शन होंगे। हालांकि, आम दिन में मंदिर सुबह 7:45 बजे से 12 बजे तक और शाम को 5:30 बजे से रात 9:30 बजे तक दर्शन को खुलता है। हरियाली तीज पर मंदिर 12 घंटे 15 मिनट खुला रहेगा।
-सुख सेज पर किया विश्राम : भगवान जब झूले पर दर्शन देकर थक जाते हैं, तब इसी सुख की सेज पर विश्राम करते है। इसी पर बीड़ा (पान), लड्डू, जल, श्रृंगार का सामान रखा जाता है।
चांदी के झूले में विराजमान होंगे भगवान रंगनाथ








