1051 करोड़ के विकास के बीच बंद स्कूलों का मुद्दा

योगी के दौरे के बाद सपाइयों ने खोली शिक्षा व्यवस्था की ‘पोल’, शिक्षक दिवस पर बंद विद्यालयों के बाहर पहुंचा सपा का ‘विद्यालय खुलेंगे तो पढ़ेगा PDA अभियान

मथुरा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दो दिवसीय मथुरा दौरा खत्म हो चुका है। ब्रज को विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात मिली है। मुख्यमंत्री ने 1051 करोड़ रुपये की 229 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। सड़क, पर्यटन, शहरी सुविधाओं और अन्य विकास कार्यों को लेकर सरकार ने अपनी उपलब्धियां गिनाईं।

लेकिन मुख्यमंत्री के लौटते ही मथुरा की राजनीति में विकास के दावों के बीच सरकारी स्कूलों का सवाल खड़ा हो गया है।

शिक्षक दिवस के मौके पर समाजवादी पार्टी ने मांट विधानसभा क्षेत्र के उन सरकारी विद्यालयों का रुख किया, जिन्हें पार्टी बंद होने या बंद किए जाने की स्थिति में बता रही है। सपा नेताओं ने बंद विद्यालयों के बाहर प्रदर्शन कर सरकार से सवाल पूछा कि जब ब्रज के विकास पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं तो गांव के बच्चों की पढ़ाई के लिए सरकारी स्कूलों के दरवाजे क्यों बंद हो रहे हैं?

सपा के वरिष्ठ नेता संजय लाठर के अनुसार मांट विधानसभा क्षेत्र में करीब 26 सरकारी स्कूल बंद किए गए हैं। पार्टी ने शिक्षक दिवस को ही सरकार के सामने यह सवाल रखने के लिए चुना कि जिन स्कूलों में कभी बच्चों की आवाज गूंजती थी, वहां अब ताले क्यों दिखाई दे रहे हैं।

मथुरा में विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

एक तरफ 1051 करोड़ की सौगात, दूसरी तरफ स्कूलों पर ताले

सियासी तौर पर सपा ने इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के हालिया दौरे से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश की है।

मुख्यमंत्री के मथुरा दौरे के दौरान 1051 करोड़ रुपये की 229 परियोजनाओं की चर्चा रही। अब सपा नेताओं का सवाल है कि विकास का असली पैमाना केवल बड़ी परियोजनाएं हैं या फिर गांव के बच्चे भी इस विकास का हिस्सा हैं?

पार्टी ने इसी सवाल को लेकर अपना अभियान तेज किया है—“विद्यालय खुलेंगे तो पढ़ेंगे।”

सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार को सरकारी स्कूलों को बंद करने के बजाय उनमें शिक्षक, संसाधन और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। ग्रामीण इलाकों में सरकारी विद्यालय गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों की शिक्षा का सबसे महत्वपूर्ण आधार हैं।

कैमरे में कैद हुई बंद स्कूलों की तस्वीरें

सपा कार्यकर्ता केवल नारेबाजी तक सीमित नहीं रहे। पार्टी की ओर से बंद अथवा बंद होने की स्थिति में बताए जा रहे विद्यालयों के वीडियो बनाए गए और तस्वीरें खींची गईं। इन्हीं के माध्यम से पार्टी ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था की जमीनी स्थिति जनता के सामने रखने का दावा किया।

हालांकि इन कार्यक्रमों की तस्वीरों और वीडियो में अभियान के समर्थन में कार्यकर्ताओं की संख्या सीमित नजर आई, जिससे यह सवाल भी खड़ा होता है कि क्या सपा इस मुद्दे को व्यापक जनआंदोलन में बदल पाएगी या यह फिलहाल पार्टी के सीमित राजनीतिक प्रदर्शन तक ही रहेगा।

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यानी सपा के सामने दोहरी चुनौती है—सरकार पर सवाल उठाना और अपने अभियान को गांव-गांव की जनता से जोड़ना।

गांवों के स्कूल बने सियासी अखाड़ा

रायपुर, सुहागपुर, मुदलिया, बादनपुर, भालई, पिरसुआ, सुथरिया, अंधियार, हुलासीगढ़ी, खेरिया नगला, सकतपुर, इखू और शंकर गढ़ी समेत कई गांवों के विद्यालयों को लेकर सपा ने सवाल उठाए हैं।

पार्टी नेताओं का कहना है कि जिन गांवों में विद्यालय बंद हैं या बंद होने की स्थिति में हैं, वहां बच्चों को शिक्षा के लिए दूसरे स्थानों पर जाना पड़ रहा है। सपा ने इसे ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर स्थिति बताते हुए सरकार से विद्यालयों को फिर से संचालित करने की मांग की।

सपा ने किया सत्ता में आने पर स्कूल खोलने का वादा

सपा नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि यदि प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो बंद किए गए विद्यालयों को दोबारा खोलने का काम किया जाएगा।

पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय लाठर ने कहा कि शिक्षक दिवस पर बंद स्कूलों के बाहर खड़े होकर प्रदर्शन करना केवल विरोध नहीं, बल्कि सरकार को आईना दिखाने की कोशिश है।

उनके साथ पार्टी नेता जमील खान, सुभाष नोहबर, होशियार सिंह नरवार, रिंकू चौधरी, सोनू पचहरा, परवीन सिंह, बंटी, रणवीर सिंह प्रधान और पदम सिंह फौजदार सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।

अब सवाल स्कूलों का है…

मथुरा में फिलहाल सियासी तस्वीर दिलचस्प है। एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दौरा और हजार करोड़ से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात है, तो दूसरी तरफ विपक्ष उसी जिले के गांवों में बंद स्कूलों के दरवाजे दिखाकर सरकार से सवाल पूछ रहा है।

सरकार विकास की तस्वीर दिखा रही है, विपक्ष स्कूलों के ताले दिखा रहा है।

अब असली सवाल यही है कि मथुरा के विकास की इस बड़ी तस्वीर में गांव के सरकारी स्कूलों की जगह कहां है?

और सपा का नारा—“विद्यालय खुलेंगे तो पपढ़ेगा PDA—क्या आने वाले दिनों में मांट की राजनीति का नया मुद्दा बन पाएगा, या फिर शिक्षक दिवस का यह प्रदर्शन भी बाकी राजनीतिक प्रदर्शनों की तरह कुछ तस्वीरों और वीडियो तक सिमटकर रह जाएगा?