भजनों से झूमी कृष्णनगरी, दीपों से दमकी यमुना

रामकुमार रौतेला वरिष्ठ पत्रकार

श्रीकृष्णोत्सव-2026 में भक्ति, संस्कृति और दीपोत्सव ने बांधा समां

मथुरा। जन्माष्टमी पर कान्हा की नगरी भक्ति और उल्लास में सराबोर रही। श्रीकृष्णोत्सव-2026 के तहत शुक्रवार को मथुरा में भजन, संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ यमुना घाटों पर दीपदान ने आध्यात्मिक वातावरण को और गहरा कर दिया। पाञ्चजन्य प्रेक्षागृह में कन्हैया मित्तल के भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे तो यमुना के घाटों पर जलते दीपों ने कृष्णनगरी की रात को रोशन कर दिया।

डैम्पियर नगर स्थित पाञ्चजन्य प्रेक्षागृह में दिनभर सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। युवा कथावाचक मोहित शेवानी ने ‘कृष्णानायन—सुनिए वो जो कभी कहा नहीं गया’ की प्रस्तुति से कृष्ण से जुड़े अनसुने प्रसंगों को संगीतात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया। इसके बाद हार्टफुलनेस फाउंडेशन की ओर से स्नीति मिश्रा ने ‘कृष्ण : अनंत रंग, अनंत भाव’ की प्रस्तुति दी। अनिरबान के बांसुरी वादन और मैत्रेयी राय के भजन गायन ने वातावरण को कृष्णमय कर दिया।

कन्हैया मित्तल के भजनों पर झूमे श्रद्धालु

शाम को कन्हैया मित्तल की भजन संध्या ने कार्यक्रम को चरम पर पहुंचा दिया। ‘श्याम से मिलने का सत्संग’, ‘मेरे बांके बिहारी लाल’, ‘कीर्तन की है रात’ और ‘हारे के सहारे आजा’ जैसे भजनों पर श्रद्धालु तालियों के साथ झूमते रहे। प्रेक्षागृह में लगातार ‘राधे-राधे’ और ‘श्याम बाबा की जय’ के जयकारे गूंजते रहे। युवाओं ने भी भक्ति संगीत का जमकर आनंद लिया।

दीपों से झिलमिलाए यमुना के घाट

इधर श्रीकृष्णोत्सव के तहत यमुना के घाटों पर दीपोत्सव का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने यमुना में दीपदान किया। घाटों पर कतारबद्ध जलते दीप और यमुना की लहरों पर पड़ती उनकी रोशनी ने मनोहारी दृश्य प्रस्तुत किया। भक्ति गीतों और दीपों की रोशनी से यमुना तट का वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक नजर आया।

शहर के प्रमुख चौराहों और तिराहों पर भी श्रीकृष्णोत्सव की छटा बिखरी। सजाए गए मंचों पर लोक कलाकारों ने कृष्णलीला, रासलीला और लोकनृत्य प्रस्तुत कर ब्रज की संस्कृति के रंग दिखाए। जन्माष्टमी पर मथुरा में भजन की गूंज, लोक संस्कृति की प्रस्तुति और यमुना के दीपों की रोशनी ने मिलकर कान्हा की नगरी को भक्ति के रंग में रंग दिया।