श्री कृष्ण जन्मभूमि प्रकरण: पंचायती दंगल में महेंद्र की दहाड़

“आज तक” के दंगल पंचायत में आमने-सामने आए हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप और मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता वारिश पठान
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद एक बार फिर टीवी बहस के केंद्र में नजर आया। देश के प्रमुख न्यूज चैनल आज तक के चर्चित कार्यक्रम दंगल पंचायत में एंकर अंजना ओम कश्यप के सामने हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट और मुस्लिम पक्ष के अधिवक्ता वारिश पठान आमने-सामने आए। बहस के दौरान धार्मिक आस्था, इतिहास, कानून और विवादित भूमि को लेकर दोनों पक्षों में तीखे सवाल-जवाब हुए।
हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट
कार्यक्रम में महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट अपने साथ कानून की प्रति लेकर पहुंचे। उन्होंने अपने पक्ष में कानूनी प्रावधानों और देवता के अधिकार से जुड़े सिद्धांतों का उल्लेख किया। बहस के दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि की एक इंच भूमि भी मुस्लिम पक्ष को नहीं दी जाएगी।

क्या कहा हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने, जाने। 

वारिश पठान को संबोधित करते हुए महेंद्र प्रताप सिंह ने चुनौतीपूर्ण अंदाज में कहा—“कान खोलकर सुन लो पठान साहब, मंदिर तो हम बनाकर रहेंगे। दुनिया की कोई ताकत हमें रोक नहीं सकती।”

बहस के दौरान उन्होंने अपने चर्चित नारे “आ गए हैं अवध बिहारी, अब आएंगे कृष्ण मुरारी” को भी दोहराया। नारे के दौरान मंच पर मौजूद दर्शकों की ओर से तालियां भी सुनाई दीं।

सवालों के बीच बार-बार आया “सुप्रीम कोर्ट”

कार्यक्रम में बहस आगे बढ़ने के साथ दोनों अधिवक्ताओं के बीच सवाल-जवाब और तीखे होते गए। महेंद्र प्रताप सिंह के सवालों पर वारिश पठान कई बार “सुप्रीम कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट” कहते नजर आए।
इसी दौरान वारिश पठान ने जवाबी अंदाज में महेंद्र प्रताप सिंह को ही “सुप्रीम कोर्ट” कह दिया और अंजना ओम कश्यप की ओर देखने लगे। बढ़ते तनाव के बीच अंजना ओम कश्यप ने हाथ उठाकर अभय मुद्रा का इशारा किया और बहस को नियंत्रित करते हुए “ऑर्डर, ऑर्डर” कहा। इस दौरान मंच पर मेज थपथपाने का दृश्य भी देखने को मिला और कार्यक्रम का माहौल कुछ देर के लिए वास्तविक पंचायती दंगल जैसा नजर आया।

अंजना ने पूछा—राजनीति में जाने का इरादा है?

बहस के दौरान महेंद्र प्रताप सिंह के राजनीतिक तेवरों पर अंजना ओम कश्यप ने उनसे सवाल किया—“यह राजनीतिक मंच हमने उपलब्ध नहीं करवाया है। क्या चुनाव लड़ने का भी इरादा है?”
इसके बाद उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा—“टिकट मिल जाए तो बुराई क्या है।” महेंद्र प्रताप सिंह की प्रतिक्रिया के बाद अंजना ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा—“नहीं मिले तो लड्डू हमें भी खिला देना।”
इस टिप्पणी से कुछ देर के लिए बहस का माहौल हल्का हुआ, लेकिन श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा मूल विवाद चर्चा के केंद्र में बना रहा।

साक्ष्यों के साथ अदालत पहुंचने का दावा

महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने कार्यक्रम में दावा किया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामले में उन्होंने केवल सार्वजनिक मंचों पर अपनी बात नहीं रखी, बल्कि देश-विदेश के पुस्तकालयों और विभिन्न स्रोतों से ऐतिहासिक दस्तावेज एवं साक्ष्य जुटाकर उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया है।
उनका कहना है कि मामले से जुड़े ऐतिहासिक और कानूनी पहलुओं को वह न्यायालय के समक्ष साक्ष्यों के साथ रख रहे हैं और आने वाले समय में भी इन दस्तावेजों को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाएगा।
बहस के दौरान न्यायालय में हुई कार्यवाही और सितंबर में हुई सुनवाई का भी उल्लेख आया। इसको लेकर यह सवाल भी सामने आया कि संबंधित समय पर न्यायालय की ओर से वास्तव में क्या आदेश पारित किया गया था और उसका मामले पर क्या प्रभाव पड़ा।

पुराने दस्तावेज और नक्शे सामने रखने की तैयारी

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट का कहना है कि उनके पास इस मामले से जुड़े पुराने दस्तावेज और अन्य साक्ष्य मौजूद हैं। उनका दावा है कि आने वाले समय में इन दस्तावेजों को न्यायालय के समक्ष मजबूती से रखा जाएगा।
वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े पुराने दस्तावेजों और स्थल के नक्शे को भी सार्वजनिक चर्चा में सामने रखने की तैयारी कर रहे हैं।
दंगल पंचायत में महेंद्र प्रताप सिंह के आक्रामक तेवर और कानूनी दस्तावेजों के साथ रखे गए तर्कों ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद को एक बार फिर चर्चा में ला दिया।

उनका संदेश स्पष्ट नजर आया—

आ गए हैं अवध बिहारी, अब आएंगे कृष्ण मुरारी।”

मंच पर हुई इस बहस ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े दावों का अंतिम फैसला इतिहास और सार्वजनिक बहस से नहीं, बल्कि न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और कानून के आधार पर होना है।