जहां श्रद्धा ही अर्थव्यवस्था है, ब्रज में उमड़ा आस्था का महासैलाब

मनोज चौधरी, मथुरा

ब्रज में उमड़ा आस्था का महासैलाब”

कान्हा की नगरी मथुरा और पूरा ब्रज क्षेत्र इन दिनों केवल तीर्थ नहीं, बल्कि जीवंत आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन चुका है। मंदिरों की घंटियों, हरिनाम संकीर्तन और श्रद्धालुओं की गूंजती जयकारों के बीच ब्रजभूमि एक बार फिर अपने विराट स्वरूप में दिखाई दे रही है। योगी सरकार की नीतियों और बुनियादी ढांचे के विस्तार ने ब्रज को देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों की पहली पसंद बना दिया है।


सुबह से देर रात तक श्रीकृष्ण जन्मभूमि, बांके बिहारी, द्वारकाधीश, गोवर्धन, राधाकुंड और वृंदावन के मंदिरों में उमड़ती भीड़ यह बताने के लिए काफी है कि ब्रज की आध्यात्मिक शक्ति आज भी उतनी ही प्रभावशाली है। श्रद्धालुओं की आंखों में आस्था और कदमों में विश्वास है—क्योंकि अब यात्रा पहले से अधिक सुलभ और सुरक्षित हो गई है।
आवागमन आसान, श्रद्धा का प्रवाह तेज
बेहतर सड़कें, हाईवे, यमुना एक्सप्रेस-वे और सुदृढ़ रेल नेटवर्क ने ब्रज को बड़े शहरों से मजबूती से जोड़ दिया है। दिल्ली, आगरा और लखनऊ से मथुरा पहुंचना अब पहले से कहीं आसान हो गया है। इसका असर यह है कि सप्ताहांत ही नहीं, सामान्य दिनों में भी मंदिरों और परिक्रमा मार्गों पर श्रद्धालुओं की निरंतर भीड़ देखने को मिल रही है।श्रीकृष्ण जन्मभूमि
आंकड़ों में दिखी आस्था की ताकत
पर्यटन विभाग के आंकड़े ब्रज के बदलते कद को साफ दर्शाते हैं। वर्ष 2023 में मथुरा आने वाले पर्यटकों की संख्या लगभग 7.79 करोड़ रही, जो 2024 में बढ़कर 9 करोड़ से अधिक हो गई। वहीं 2025 में सितंबर तक ही 7.20 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु ब्रज पहुंचे। यह वृद्धि केवल संख्या नहीं, बल्कि ब्रज के प्रति बढ़ते विश्वास और आकर्षण का प्रमाण है।
दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बनने की राह
पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ब्रज को वैश्विक आध्यात्मिक मानचित्र पर स्थापित करने का लक्ष्य तेजी से साकार हो रहा है। भव्य आयोजन, सुविधाओं का विस्तार और विरासत का संरक्षण—इन सबने मिलकर ब्रज को भविष्य का सबसे बड़ा आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बनाने की नींव रख दी है।
श्रद्धा से रोजगार तक का सफर
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या ने ब्रज की अर्थव्यवस्था को भी नई गति दी है। होटल, धर्मशाला, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय बाजारों में रौनक बढ़ी है। हजारों परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर पर्यटन से जुड़ चुकी है। सरकार की योजना है कि एक-दिवसीय यात्रा करने वाले श्रद्धालु ब्रज में एक सप्ताह तक ठहरें और यहां की संस्कृति, ग्रामीण जीवन और परंपराओं से जुड़ें।
आज ब्रजभूमि केवल मंदिरों की नगरी नहीं, बल्कि आस्था, विकास और आत्मिक अनुभव का संगम बन चुकी है—जहां हर कदम पर श्रद्धा है और हर मार्ग पर श्रीकृष्ण की अनुभूति।