श्रीकृष्ण जन्मभूमि अब केवल एक मुकदमा नहीं ? 

 मनोज चौधरी

श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति को लेकर चल रहा संघर्ष अब पांच वर्ष पूरे कर चुका है। यह संघर्ष केवल अदालतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। इसका उद्देश्य श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों और साक्ष्यों को देश-विदेश में बसे हर हिंदू तक पहुंचना रहा है। इस पूरे अभियान के केंद्र में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट रहे हैं।

बेल्जियम, ऑस्ट्रिया, स्पेन और बंगाल से चलकर आंदोलन का समर्थन करने आए श्रीकृष्ण भक्त

23 दिसंबर 2020 को न्यायालय द्वारा वाद स्वीकार किए जाने के बाद यह मुद्दा सार्वजनिक विमर्श में आया। इसके बाद बीते पांच वर्षों में कानूनी लड़ाई के साथ-साथ सामाजिक और वैचारिक स्तर पर भी लगातार प्रयास किए गए। आंदोलन को मजबूती देने के लिए समय-समय पर कार्यक्रम, यात्राएं और संवाद आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य समाज को इस विषय पर जागरूक करना रहा।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के लिए निकली गई श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति ज्योति यात्रा। इसका नेतृत्व महेंद्र प्रताप सिंह एडवकोट ने किया।
जर्मनी संत प्रमाद्वितीय से मुलाकात करते महेंद्र प्रताप सिंह एडवकोट और उनके साथ है संत श्यामानंद जी महाराज

इस क्रम में 27 नवंबर 2024 को वृंदावन में अंतरराष्ट्रीय धर्म संसद का आयोजन हुआ। इसमें देश-विदेश से आए संतों, धर्माचार्यों और विचारकों ने भाग लिया और श्रीकृष्ण जन्मभूमि के विषय पर अपने विचार रखे। इस आयोजन ने आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का काम किया।

महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट

इसके बाद 11 जनवरी 2025 को श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मुख्य द्वार से हस्ताक्षर अभियान शुरू किया गया। इस अभियान के माध्यम से आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की गई और यह दिखाने का प्रयास किया गया कि यह मुद्दा केवल कुछ लोगों का नहीं, बल्कि समाज के एक बड़े वर्ग की भावना से जुड़ा है।

1 फरवरी 2025 को प्रयाग महाकुंभ में महासंवाद की शुरुआत हुई। यहां साधु-संतों, धर्माचार्यों और श्रद्धालुओं के बीच इस विषय पर खुलकर चर्चा हुई। इसके बाद 24 जून 2025 को हिंदू चेतना यात्रा का आरंभ किया गया, जिसका उद्देश्य गांव-गांव तक इस विषय को पहुंचना था। इसी क्रम में अगले महीने ‘चलो गांव की ओर’ अभियान शुरू हुआ, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी जागरूकता बढ़ी।

7 जनवरी 2026 को वृंदावन से श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति ज्योति यात्रा का शुभारंभ किया गया। यह यात्रा संघर्ष के पाँच वर्षों की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है। इस दौरान महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने देश के प्रमुख संत-महात्माओं से भी भेंट कर इस मुद्दे पर संवाद किया। इनमें स्वामी गोविंदगिरी, जगद्गुरु रामभद्राचार्य, शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती, बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री, स्वामी ज्ञानानंद और प्रेमानंद जी महाराज प्रमुख रूप से शामिल हैं।

पांच वर्षों के इस संघर्ष में आंदोलन ने निरंतर विस्तार पाया है। कानूनी प्रक्रिया अपनी गति से चल रही है, वहीं सामाजिक स्तर पर जागरूकता लगातार बढ़ी है। यह साफ है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि का प्रश्न अब केवल एक अदालती मामला नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और पहचान से जुड़ा विषय बन चुका है।

संत श्यामानंद जी महाराज बताते हैं कि

पंडित श्यामानंद जी महाराज

वाले समय में इस संघर्ष की दिशा क्या होगी, यह न्यायालय के निर्णय पर निर्भर करेगा। लेकिन इतना तय है कि बीते पांच वर्षों में यह मुद्दा समाज के बड़े हिस्से तक पहुंच चुका है और श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति का संघर्ष एक संगठित और सतत आंदोलन का रूप ले चुका है।