वंदना शर्मा
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कृष्णा तेरी तेरे देश में हो रही जय-जय कार। धन्य-धन्य ये बृज भूमि जो तूने चरण चिन्ह यहां डाले। भाग्यवान है कृष्णा तेरे देश में रहने वाले। लेते ही जन्म गोकुल की ओर आंधी-पानी में धायौ, नंद घर आनंद भयौ जब सबेरे मुख चन्द्र दिखायौ। वही चंद्र ब्रज चंद्र बनयौ और जग में कियौ उजालौ।
भादौ की नौमी को धीरे धीरे पौ फट रही थी, ग्वालिनें खिरकन की ओर गायों को चारा दाना खिलाने और दुहाने के लिए जा रही थी। गलियों में एक दूसरे से मिली और कहने लगी कि यशोदा ने लल्ला जायौ है।
मच गयौ हल्ला, नंद घर आयो लल्ला
जा काऊ ने नंद यशोदा के घर लल्ला के जन्मने की खबर सुनी। वही में लैवे का जै नंद बाबा के घर माऊं भागतौ चाल्यो ।
आज गोकुल में यही दृश्य है, जो द्वापर में रहा होगा। हर तरफ से एक ही शोर सुनाई दे रहा है कि जय कन्हैया लाला, हाथी लीने घोड़ा लीने और ली पालकी। बृजवासी एक दूसरे को लाला के जन्म की बधाई से रहे हैं। नाच रहे हैं गा रहे हैं। माखन मिश्री और हल्दी का मिश्रण लुटा रहे हैं।








