महिला आयोग से आप कार्यकर्ताओं को हटाना उपराज्यपाल का सराहनीय कदम
— विवेक बोले भ्रष्टाचार के दलदल में फंसी केजरीवाल सरकार, कांग्रेस उसकी पिछलग्गू
नई दिल्ली। भाजपा के वरिष्ठ नेता कमला नगर निवासी विवेक शर्मा ने उपराज्यपाल वीके सक्सेना द्वारा दिल्ली महिला आयोग से 223 कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से हटाने के फैसले का स्वागत किया है। विवेक शर्मा का कहना है कि ऐसी ही बंदर बांट आम आदमी पार्टी ने तमाम सरकारी विभागों में की है, जिसकी दोषी अब कांग्रेस पार्टी भी है जब गठबंधन करके लोकसभा का चुनाव आम आदमी पार्टी की बी टीम के रूप में लड़ रही है। उन्होंने उपराज्यपाल से मांग दिल्ली सरकार के विभागों में केजरीवाल सरकार द्वारा की गई तमाम नियुक्तियां की जांच कर उन्हें रद्द किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि तमाम नियमों को ताक पर रखकर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को सरकारी संस्थानों में जबरदस्ती बोझ बना कर रख दिया है। दिल्ली महिला आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने नियमों के खिलाफ जाकर बिना अनुमति के इनकी नियुक्ति की थी। DCW एक्ट का हवाला देते हुए विवेक शर्मा ने कहा कि आयोग केवल 40 कर्मचारियों को ही रख सकता है, लेकिन LG की मंजूरी के बिना 223 नए पद बनाए। आयोग के पास कॉन्ट्रैक्ट पर कर्मचारियों की नियुक्ति का अधिकार नहीं है।
विवेक ने कहा कि हैरानी की बात है दिल्ली महिला और बाल विकास विभाग ने महिला आयोग को 27 सितंबर 2016 को महिला आयोग के मेंबर सचिव को पत्र लिखा। इस पत्र में महिला आयोग की ओर से की गई नियुक्तियों के लिए वित्तीय सहायता देने के नियम और शर्तें बताईं। इसमें कहा गया कि आयोग बिना फाइनेंस डिपार्टमेंट और एडमिनिस्ट्रेशन की इजाजत के कोई ऐसी गतिविधि नहीं कर सकता, जिसमें अतिरिक्त वित्तीय भार पड़े। इसमें नई नियुक्तियां करना और राष्ट्रीय राजधानी में सैलरी का स्ट्रक्चर मौजूदा स्ट्रक्चर से ज्यादा करना भी शामिल है। आयोग ने जो नियुक्तियां की उनका बजट 2 करोड़ से ज्यादा है। दूसरा पत्र 5 अक्टूबर 2016 को लिखकर महिला एवं बाल विकास विभाग ने महिला आयोग को बताया कि नियुक्तियों के लिए LG की इजाजत नहीं ली गई है। दिल्ली महिला आयोग एक्ट 2013 के मुताबिक सरकार ही जरूरत पड़ने पर महिला आयोग को ऐसे अफसर और कर्मचारी मुहैया कराएगी। महिला आयोग को खुद ऐसे कर्मचारियों की नियुक्ति करने का अधिकार नहीं है। आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष स्वाति मालीवाल को कई बैठकों में यह सलाह दी गई कि वो फाइनेंस डिपार्टमेंट की मंजूरी ले लें। इस सलाह को अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने नहीं माना, जिसके चलते नियुक्त किए गए 223 कर्मचारियों की पेमेंट मेंबर सेक्रेटरी ने रिलीज नहीं की। मेंबर सेक्रेटरी ने भी स्पष्ट कर दिया था यह नियुक्तियां तय प्रक्रिया के तहत नहीं की गई हैं।