लोकसभा के चुनावों में पहली बार मथुरा में प्रत्याशियों ने नहीं, असल चुनाव तो जनता ने लड़ा। भाजपा, इंडिया गठबंधन और बसपा के प्रत्याशी इस बार जिले के अधिकांश गांवों में चुनाव प्रचार करने के लिए नहीं पहुंच पाए। यहां तक कई ऐसे गांव भी रहे जहां भाजपा के भी कार्यकर्ता भी वोट मांगने के लिए नहीं गए। जबकि भाजपा की टीम इंडिया गठबंधन और बसपा के कैडर से कई गुना सशक्त है। इसके अलावा भाजपा के संग रालोद भी चुनाव में खड़ा था। इंडिया गठबंधन और बसपा के तो हर बूथ पर बस्ता तक नहीं लग सके, पर वहां दोनों ही दलों के लिए वोट डलवाने वाले पूरी ताकत के साथ खड़े नजर आए। लगा कि इस बार प्रत्याशी कम और जनता ज्यादा चुनाव लड़ रही है। वह भाजपा के खिलाफ खड़े नजर आए।
बदलती नजर आई मुफ्त राशन की विचारधारा
महानगर क्षेत्र के एक मतदान केंद्र पर ई रिक्शा से अपने परिवार को लेकर वोट डालने के लिए आए कुंभकार से जब मतदान के बाद खुलकर बातचीत की गई तो उनका गणित ही मुफ्त के राशन वितरण की सोच को भी बदलने वाला था। आठ सदस्यीय इस परिवार में तीन भाई है। जो अपने अपने परिवार के साथ अलग (न्यारे) रहते हैं। उनका कहना था कि भाजपा ने दस साल पहले जो वादा किया वह पूरा नहीं किया। मुफ्त का राशन तो दिया और महंगाई बढ़ा दी। ई रिक्शा कर्ज लेकर लिया। उसको भी यहां सरकार चलाने नहीं दे रही है। ठेल भी लगाने नहीं दी रही। फेक्ट्री में काम नहीं मिल रहा है।फांके की हालत में गुजर बसर करने के लिए मजबूर है। उन्होंने इंडिया गठबंधन के घोषणा पत्र का भी जिक्र करते हुए कहा कि अगर एक एक लाख रुपए मिले तो तीन लाख साल में उनके तीनों भाइयों को मिल जाएंगे। राशन तो कोई सरकार आ जाए। मुफ्त नहीं मिलेगा तो सस्ती दर पर मिल जाएगा। फिर, भी धोखा होता तो अगली बार, उसे भी वोट नहीं देंगे।
जयंत चौधरी को भी मिल सकता है करारा जवाब
जयंत चौधरी के निर्णय से भी मथुरा में उनके कट्टर समर्थक खफा नजर आए। रालोद को चुनाव परिणाम बाद बड़ा झटका लगने के लिए जा रहा है। जिस जाट लैंड में रालोद अपने आप को मजबूत होने का दावा करता रहा है, उसके भी वोटर खिसक गए। वह भाजपा के पाले में न जाकर बसपा और इंडिया गठबंधन की और चले गए। किसानों को इंडिया गठबंधन की कर्ज माफी की घोषणा ने रालोद के पाले से अपनी ओर खींचने का काम किया।
निर्दलीय प्रत्याशी भानू प्रताप भी खूब चल
निर्दलीय प्रत्याशी भानू प्रताप भी कई बूथों पर वोट हासिल करते नजर आए। खास करके उनका प्रभाव सजातीय वोटो में दिखा। वह भी भाजपा के वोटो के प्रतिशत को कम करते हुए नजर आए।
फिर भी अथिति देवो भव
भाजपा के लिए संतोष की बात यह है कि यहां मतदाताओं के इधर उधर छिटक जाने के बाद भी मथुरा एक बार फिर अतिथि देवो भव का ही सम्मान करता हुआ दिखाई दे रहा है। मथुरा लोकसभा से हेमा मालिनी की जीत में वोटों का प्रतिशत कम जरूर हो सकता है, पर उनकी हैट्रिक लगभग तय मानी जा रही है।
शांति पूर्वक हुआ मतदान
मतदान सकुशल, निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। मंडलायुक्त रितु माहेश्वरी, अपर आयुक्त प्रशासन राजेश कुमार, डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह और एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय पुलिस फोर्स के साथ लगातर भ्रमण पर रहे। विभिन्न मतदेय स्थलों का निरीक्षण किया एवं शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे मतदान की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मंडल आयुक्त ने बल्देव विधानसभा क्षेत्र में नवीन प्राथमिक विद्यालय महुअन, मथुरा विधानसभा क्षेत्र में प्राथमिक विद्यालय औरंगाबाद, अमरनाथ गर्ल्स डिग्री कॉलेज इत्यादि मतदेय स्थलों का निरीक्षण किया। यहाँ चल रही मतदान की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। लाइन में खड़े मतदाताओं से बातचीत कर यह जानने का प्रयास किया कि मतदान के दौरान किसी भी तरह की समस्या या परेशानी तो नहीं हो रही है। इसके बाद मंडलायुक्त ने मथुरा कलेक्ट्रेट परिसर में बने वेब कास्टिंग एंड कम्युनिकेशन कंट्रोल रूम का भी निरीक्षण किया। यहाँ से जिले के 50 प्रतिशत मतदेय स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे से रखी जा रही नज़र/ निगरानी की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया।
युवा एवं महिला वर्गों के लिए जनपद मथुरा में प्रेमदेवी अग्रवाल गर्ल्स इंटर कॉलेज में ‘युवा बूथ’ और बीएसए कॉलेज में ‘सखी बूथ’ के रूप में बने मतदेय स्थल तथा मांट विधानसभा क्षेत्र में आदर्श मतदान केंद्र बने प्राथमिक विद्यालय पानीगांव का भी निरीक्षण किया और यहां पर चल रही मतदान संबंधी व्यवस्थाओं को देखा।









