मथुरा
पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और पीवी नरसिंहा राव को सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ देने का एलान किया है। वैज्ञानिक एमएस स्वामीनाथन को भी भारत रत्न देने का एलान किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘एक्स’ पर इसका एलान किया।
युवा रालोद ब्रज प्रांत के क्षेत्रीय अध्यक्ष उमेश चौधरी ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री चरण बाबूगढ़ छावनी के निकट नूरपुर गांव, तहसील हापुड़, जनपद गाजियाबाद, कमिश्नरी मेरठ में काली मिट्टी के अनगढ़ और फूस के छप्पर वाली मढ़ैया में 23 दिसम्बर,1902 को जन्म हुआ था। चौधरी साहब को उनक पिता चौधरी मीर सिंह ने अपने नैतिक मूल्यों को विरासत में चरण सिंह को सौंपा था। बाद में चौधरी मीर सिंह सपरिवार नूरपुर से जानी खुर्द के पास भूपगढी आकर बस गये थे। यहीं के परिवेश में चौधरी चरण सिंह ने गांव-गरीब-किसान के शोषण के खिलाफ संघर्ष का पाठ पढ़ा।
उमेश चौधरी ने बताया कि चौधरी साहब ने आगरा यूनिवर्सिटी से कानून की शिक्षा लेकर 1928 में चौधरी चरण सिंह गाजियाबाद में वकालत करना शुरू कर दिया। कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन 1929 में पूर्ण स्वराज्य की घोषणा से प्रभावित होकर चौधरी साहब ने चरण सिंह ने गाजियाबाद में कांग्रेस कमेटी का गठन किया। 1930 में महात्मा गांधी जी के सविनय अवज्ञा आन्दोलन के तहत् नमक कानून तोडने का आह्वान किया गया। आजादी के दीवाने चरण सिंह ने गाजियाबाद की सीमा पर बहने वाली हिण्डन नदी पर नमक बनाया। इस मामले उनको छह माह की सजा हुई। जेल से वापसी के बाद चरण सिंह ने महात्मा गाँधी के नेतृत्व में स्वयं को पूरी तरह से स्वतन्त्रता संग्राम में समर्पित कर दिया। 1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह में भी चरण सिंह गिरफतार हुए। अक्टूबर 1941 में रिहा हुए। उस समय असंतोष व्याप्त था। 9 अगस्त 1942 को अगस्त क्रांति के माहौल भूमिगत होकर उन्होंने गाजियाबाद, हापुड़, मेरठ, मवाना, सरथना, बुलन्दशहर के गाँवों में गुप्त क्रांतिकारी संगठन तैयार किया। मेरठ कमिश्नरी में उन्होंने अपने क्रांतिकारी साथियों के साथ मिलकर ब्रितानिया हुकूमत को बार-बार चुनौती दी।
रालोद के युवा नेता ने बताया कि चौधरी साहब के आंदोलन से भयभीत होकर मेरठ प्रशासन ने चरण सिंह को देखते ही गोली मारने का आदेश जारी कर दिया था।
आखिरकार पुलिस ने एक दिन चरण सिंह को गिरफतार कर ही लिया। राजबन्दी के रूप में डेढ़ वर्ष की सजा हुई। जेल में ही चौधरी साहब ने शिष्टाचारबभारतीय संस्कृति और समाज के शिष्टाचार के नियमों का एक पुस्तक भी लिखी।
युवा नेता ने बताया कि वह किसानों के नेता थे। जमींदारी उन्मूलन विधेयक राज्य के कल्याणकारी सिद्धांत पर आधारित था। एक जुलाई 1952 को यूपी में उनके बदौलत जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ और गरीबों को अधिकार मिला। उन्होंने लेखापाल के पद का सृजन भी किया। किसानों के हित में उन्होंने 1954 में उत्तर प्रदेश भूमि संरक्षण कानून को पारित कराया। वो 3 अप्रैल 1967 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। 17 अप्रैल 1968 को उन्होंने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। मध्यावधि चुनाव में उन्होंने अच्छी सफलता मिली और दुबारा 17 फ़रवरी 1970 के वे मुख्यमंत्री बने। उसके बाद वो केन्द्र सरकार में गृहमंत्री बने तो उन्होंने मंडल और अल्पसंख्यक आयोग की स्थापना की। 1979 में वित्त मंत्री और उपप्रधानमंत्री के रूप में राष्ट्रीय कृषि व ग्रामीण विकास बैंक नाबार्ड की स्थापना की। 28 जुलाई 1979 को चौधरी चरण सिंह समाजवादी पार्टियों तथा कांग्रेस (यू) के सहयोग से प्रधानमंत्री बने। उन्होंने किसान, मजदूर और गरीबों के हित के लिए कार्य किए। वास्तव में चौधरी साहब भारत रत्न के हकदार थे।









