
मनोज चौधरी
aaditya mangal news
-‘सोमनाथ पुष्प-बंगले में विराजेंगे ठाकुरजी, ‘प्रज्ञान-प्रभास पोशाक करेंगे धारण
–स्वर्ण मंडित रजत कामधेनु दिव्य गो प्रतिमा करेंगी ठाकुरजी का प्रथम अभिषेक
-गर्भ-गृह एवं श्रीकृष्ण चबूतरा को दिया जायेगा कारागार का मूल स्वरूप
-देश के चतुर्दिक विकास एवं हिन्दू राष्ट्र की कामना का होगा संकल्प
मयूर प्रभात, मथुरा: श्रीकृष्ण की जन्मभूमि पर भगवान श्रीकृष्ण का 5250 वां जन्मोत्सव सात सितंबर को मनाया जाएगा। रजत-कमल पुष्प में भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य होगा। सोमनाथ पुष्प-बंगले में प्रज्ञान प्रभास पोशाक धारण कर ठाकुर जी विराजमान होंगे। पहला अभिषेक स्वर्ण मंडित रजत कामधेनु दिव्य स्वरूपा गो प्रतिमा से किया जाएगा। गर्भ-गृह एवं श्रीकृष्ण चबूतरा को कारागार का मूल स्वरूप प्रदान किया जाएगा। इस दिन देश के चतुर्दिक विकास और हिन्दू राष्ट्र की कामना का संकल्प भी लिया जाएगा।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा-संस्थान के सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने संयुक्त रूप से बताया, इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण के 5250 वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। जन्मस्थान की साज-सज्जा, ठाकुरजी की पोशाक, श्रृंगार नयनाभिराम होंगी। जन्मभूमि के अंदर और परिसर के बाहर दर्शन लाइव दर्शन होंगे। भगवान श्रीकृष्ण की प्राकट्य भूमि, कारागार और श्रीकृष्ण चबूतरा की अद्भुत साज-सज्जा होगी। श्री गर्भ-गृह के भीतरी भाग को कारागार का स्वरूप प्रदान किया जाएगा। देश-विदेश से पधारने वाले लाखों श्रद्धालु जो कंस के कारागार में जन्मे ठाकुर जी के उसी स्वरूप के दर्शन के भाव से आ रहे हैं। इसलिए उनकी भावनाएं अवश्य ही ऐसी अद्भुत छटा से पुष्ट होंगी। गर्भगृह के बाहरी हिस्से में उत्कीर्ण भगवान के जन्म से पूर्व की लीलाएं भक्तों के आकर्षण का केंद्र होगी।
-सुमधुर वादन के साथ होगी मंगला आरती: सुबह दिव्य शहनाई और नगाड़े के सुमधुर वादन के साथ भगवान की मंगला आरती के दर्शन प्रातः: 5:30 बजे से होंगे। आठ बजे दिव्य पंचामृत अभिषेक किया जाएगा। पवित्र स्रोतों का पाठ और पुष्पार्चन होगा। दस बजे भव्य पुष्पांजलि कार्यक्रम श्री राधा कृष्ण युगल सरकार के श्रीचरणों में भागवत-भवन के दिव्य प्रांगण में तुलसीदल से पुष्पार्चन, मंगलार्चन और वेद मंत्रों के मध्य किया जायेगा। भजन-गायन भी होगा।
-रात को होगा महाभिषेक: जन्म महाभिषेक का मुख्य कार्यक्रम रात 11:00 बजे श्री गणेश-नवग्रह पूजन से आरंभ होगा । 1008 कमल-पुष्पों से ठाकुरजी का सहस्त्रार्चन होगा। मध्य रात्रि 12:00 बजे भगवान के प्राकट्य होगा। संपूर्ण मंदिर परिसर उस समय ढोल-नगाड़े, झांझ-मंजीरे, मृदंग साथ ही हरिबोल के साथ गुंजायमान हो जाएगा। भगवान के जन्म की महाआरती शुरू होगी जो रात्रि 12:05 बजे तक चलेगी। सुगंधित द्रव्यों से लिपटे हुये भगवान श्रीकृष्ण के चल विग्रह मोर्छल सन में
विराजमान होकर अभिषेक स्थल पर पधारेंगे। प्रथम अभिषेक कामधेनु स्वरूपा स्वर्ण मंडित रजत गऊ अपने पयोधर से करेंगी। गऊ विग्रह पर अनेक अनेक देवी-देवताओं की आकृतियां होगी। श्री ठाकुर जी के श्रीविग्रह अभिषेक स्थल पर रजत कमल में विजरामान होंगे।
-महंत नृत्य गोपाल का प्राप्त होगा सानिध्य : श्रीकृष्ण-जन्मस्थान सेवा-संस्थान के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास महाराज के सानिध्य में अभिषेक का कार्य संपन्न होगा। दूध, दही, घी, बूरा,शहद दिव्य औषधियां, वनस्पतियां और सुगंधित द्रव्यों का प्रयोग होगा। अभिषेक का कार्यक्रम रात्रि 12:20 बजे तक होगा। रजत कमल पुष्प में विराजित श्री ठाकुर जी का जन्म महाभिषेक रात्रि 12:20 बजे से 12:40 बजे तक होगा। श्रंगार आरती रात्रि 12:40 बजे से 12:50 बजे तक होगी। श्रद्धालुओं रात्रि 1.30 बजे प्रवेश कर सकेंगे। प्रसाद वितरण भी किया जाएगा।
-भव्य होगा नंदोत्सव : सुबह आठ बजे श्री ठाकुर जी के नित्य महाभिषेक की दिव्य प्रसादी पंचामृत का वितरण और साढ़े आठ बजे दर्शनार्थी श्रद्धालुओं को किया जायेगा। मेवे-नारियल के लड्डू, मेवे का पाग (कतली) का वितरण भी किया जायेगा। इस अलौकिक आयोजन का समापन भाद्रपद कृष्ण नवमी शुक्रवार भव्य नन्दोत्सव-बधाई गायन के साथ होगा। इस अवसर पर प्रसाद, बधाई पोटली, खिलौने, मिष्ठान, फल, वस्त्र वितरित किए जाएंगे।
-होती रहेगी उद्घोषणा: श्रद्धालुओं की सुविधा को जन्मभूमि के संपर्क मार्गो पर जूताघर और सामान घर की व्यवस्था की गई है। लाउडस्पीकर से लगातार निर्देश दिए जाएंगे। बैरिकेडिंग ऐसी होगी, कि श्रद्धालु कम समय में दर्शन हो जाए। प्रवेश गोविन्द नगर द्वार और निकासी निकास द्वार से होगी।
-इन पर होगा प्रतिबंध: मोबाइल फोन, कैमरा, रिमोट की रिंग, थैला, माचिस, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू ,चाकू, ब्लेड और अन्य कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सामान लेकर अंदर प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। आयुर्वेद-भवन प्रांगण में खोया-पाया केंद्र स्थापित किया जाएगा।
-इसलिए रखा नाम: चंद्रयान-3 की सफलता और सनातन की परंपरा को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान परिषद (इसरो) के वैज्ञानिकों ने पुनर्स्थापित किया है। इसरो के प्रमुख एस सोमनाथ (श्रीधर परिकर सोमनाथ) के नेतृत्व में यह कार्य किया गया। चंद्रवंशी भगवान श्रीकृष्ण 5250 वें जन्म महोत्सव के भव्य आयोजन में जिस पुष्प-बंगले में विराजमान हो ठाकुर जी दर्शन देंगे, उसका नाम इसरो के चीफ के नाम पर किया गया है।








