Uncategorized जैव प्रौद्योगिकी से वन्य जीवन होगा समृद्ध Written by Manoj chaudhary Daink jagran ex on February 20, 2023 More in Uncategorized: नवंबर में श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति को लेकर बड़ा आंदोलन, मथुरा में जुटेंगे हजारों कोल-भील September 22, 2026 1051 करोड़ के विकास के बीच बंद स्कूलों का मुद्दा September 5, 2026 सिर्फ सड़क ही नहीं, न्याय भी साफ कीजिए साहब! October 4, 2025 शोधकर्ता अपने कार्यों को साझा कर बनाए प्रभावी: कुलपति aadityamangal news : पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान पर सोमवार से इंडियन सोसायटी आफ जेनेटिक बायोटेक्नोलाजी रिसर्च एंड डवलपमेंट का आठवां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू हो गया। पहले दिन वन्य जीवन को सुखी और समृद्ध करने पर मंथन किया गया। इसके लिए जैव प्रौद्योगिकी को जीवन का अहम हिस्सा बताया गया। साथ ही शोधकर्ताओं से अपने कार्यों को एक-दूसरे के साथ साझा करने पर बल दिया। कहा जैव प्रौद्योगिकी से वन्य जीवन समृद्ध होगा। सम्मेलन का शुभारंभ करते हुए डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की कुलपति प्रो. आशु रानी ने कहा, बायोटेक्नोलाजी जीवन का एक अभिन्न अंग बन गई। किसी भी कार्य प्रणाली को समझने और उसमें सुधार को बायोटेक्नोलाजी की विधियां आवश्यक हैं। सम्मेलन के माध्यम से शोधकर्ता अपने कार्यों को एक-दूसरे के साथ साझा कर उसे अधिक प्रभावी बनाएंगे। सेंट्रल इंस्टीट्यूट फार रिसर्च आन बफेलो के निदेशक डा. पीके दत्ता ने पशुपालन क्षेत्र में बायोटेक्नोलाजी का प्रयोग कर पशुओं के स्वास्थ्य और उनके उत्पादन को बेहतर बनाने पर बल दिया। दुवासू के कुलपति प्रोफेसर डा. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि बायोटेक्नोलाजी एक आधुनिक विधि है। सूक्ष्म स्तर पर कोशिकाओं में होने वाले बदलाव को इसके माध्यम से स्पष्ट समझा जा सकता है। इसलिए यह आवश्यक है कि बायोटेक्नोलाजी की विधियों का उपयोग किसान के हित के शोध पर प्राथमिकता से किया जाए। देश की आवश्यकता के अनुरूप तकनीक का इस्तेमाल प्रयोग कर किसानों को समृद्ध और खुशहाल बनाया जाए, तभी सम्मेलन का उद्देश्य सफल होगा। अधिष्ठाता प्रोफेसर पीके शुक्ला ने बायोटेक्नोलाजी की तकनीक के उपयोग से कुक्कुट पालन एवं छोटे पशुओं के उत्पादन में बढ़ोतरी की जानकारी दी। बताया कि इसी तकनीक से कुक्कुट पालन के क्षेत्र में बढ़ोतरी दर वाले बायलर तैयार किए जा रहे हैं। डिजाइनर अंडे जैसे कार्यों को बायोटेक्नोलाजी के माध्यम से सफल बनाया जा सका है। सम्मेलन में वाइल्डलाइफ बायोडायवर्सिटी एवं कंजर्वेशन, बायोटेक्नोलाजी, से फसल उत्पादन की नवीन विधियां एवं एकीकृत कृषि प्रणाली पर भी विचार किया गया। दुवासू के मीडिया प्रभारी डा. मुकुल आनंद ने बताया, सम्मेलन में देश विदेश के शोधकर्ता शामिल हुए हैं। आयोजक सचिव डा. दीपक शर्मा ने कहा, दो दिवसीय सम्मेलन में विभिन्न शोधों का आदान-प्रदान और भविष्य मैं होने वाले शोध कार्यों की दिशा निर्धारित करने में सहयोग मिलेगा। Share on: WhatsApp Share 0 Tweet 0 Messenger Print Email Whatsapp