मनोज चौधरी मथुरा
फीस के कारण पढ़ाई छूटने की खबर पर डीएम चंद्र प्रकाश सिंह ने बच्चों को बुलाकर दिए स्कूल ड्रेस, बैग, किताबें और जरूरी शिक्षण सामग्री; सभी की फीस माफ, एसडीएम छाता ने लिया गोद
मथुरा, 12 अगस्त। सोशल मीडिया पर वायरल एक संदेश ने मथुरा प्रशासन का ध्यान चार ऐसे बच्चों की ओर खींचा, जिनके माता-पिता आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं और फीस जमा न हो पाने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने की बात सामने आई थी। बच्चों के हरिद्वार से कांवड़ लेकर निकलने की खबर सामने आते ही जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने मामले को केवल सोशल मीडिया की सूचना तक सीमित नहीं रखा, बल्कि तत्काल संज्ञान लेकर परिवार की स्थिति की जानकारी कराई और चारों बच्चों को कलेक्ट्रेट बुलाकर उनकी शिक्षा की जिम्मेदारी सुनिश्चित की।
कोसीकलां के बठैन गेट के निकट बैंक कॉलोनी निवासी भरत सिंह के चार बच्चे—साधना, मुस्कान, प्रेरणा और शिवम—क्रमशः कक्षा 11वीं, 9वीं, 3वीं और 7वीं में अध्ययनरत हैं। जिलाधिकारी ने बच्चों से मुलाकात कर उनकी पढ़ाई और पारिवारिक परिस्थितियों की जानकारी ली। इसके बाद चारों बच्चों को दो-दो स्कूल ड्रेस, स्कूल बैग, किताबों के सेट, पेंसिल बॉक्स, टिफिन/लंच बॉक्स, जूते और मोजे सहित आवश्यक शैक्षिक सामग्री प्रदान की गई।
फीस की चिंता भी हुई खत्म
जिलाधिकारी ने बताया कि बड़ी बेटी साधना नगर पालिका इंटर कॉलेज, कोसीकलां में कक्षा 11वीं की छात्रा है और उसकी ट्यूशन फीस पहले से ही नहीं लगती है। शेष तीन बच्चे आदर्श विद्या मंदिर, कोसीकलां में अध्ययनरत हैं। इनमें कक्षा तीन की छात्रा प्रेरणा की संपूर्ण फीस पहले से माफ है। वहीं मुस्कान की 6,800 रुपये तथा शिवम की 5,500 रुपये फीस भी माफ कर दी गई है।
डीएम ने स्कूल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए कि अब इन बच्चों से किसी प्रकार की फीस नहीं ली जाएगी। इस पहल के बाद परिवार के सामने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने को लेकर खड़ी आर्थिक चिंता काफी हद तक दूर हो गई है।
एसडीएम छाता ने चारों बच्चों को लिया गोद
जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने चारों बच्चों की शिक्षा और भविष्य को लेकर एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उप जिलाधिकारी छाता अखिलेश कुमार को बच्चों को गोद लेने के निर्देश दिए। एसडीएम छाता अब इन बच्चों की पढ़ाई सहित उनकी आवश्यकताओं की नियमित देखभाल करेंगे।
यह पहल प्रशासनिक संवेदनशीलता का ऐसा उदाहरण बनकर सामने आई है, जिसमें सोशल मीडिया पर आई एक सूचना को महज वायरल खबर मानकर नजरअंदाज करने के बजाय प्रशासन ने उसकी वास्तविकता तक पहुंचकर समाधान का रास्ता तैयार किया।
दिव्यांग माता-पिता, संघर्ष से परिवार चला रहे
जिलाधिकारी के अनुसार बच्चों के पिता भरत सिंह परचून की दुकान चलाते हैं, जबकि उनकी पत्नी सुनीता सिलाई का कार्य करती हैं। दोनों दिव्यांग हैं और उत्तर प्रदेश सरकार की दिव्यांग पेंशन योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का भी लाभ मिला है तथा एक लाख रुपये की किस्त पूर्व में प्रदान की जा चुकी है।
‘बच्चों की शिक्षा रुकनी नहीं चाहिए’
जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। आर्थिक परिस्थितियां किसी बच्चे की शिक्षा के रास्ते में बाधा न बनें, इसके लिए प्रशासन हरसंभव सहयोग करेगा।
मथुरा प्रशासन की यह पहल इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि चार बच्चों की कांवड़ यात्रा से जुड़ी भावनात्मक खबर को प्रशासन ने केवल धार्मिक आस्था के प्रसंग के रूप में नहीं देखा, बल्कि उसके पीछे छिपी शिक्षा, आर्थिक कठिनाई और बच्चों के भविष्य की वास्तविक समस्या को
पहचाना। डीएम चंद्र प्रकाश सिंह की त्वरित पहल ने यह संदेश दिया है कि संवेदनशील प्रशासन केवल समस्याओं का संज्ञान नहीं लेता, बल्कि जरूरतमंद परिवार तक पहुंचकर समाधान भी सुनिश्चित करता है।








