कृष्ण जन्मभूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा संकेत, प्रतिनिधित्व का मामला हाईकोर्ट भेजने के संकेत
महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने कहा—प्रतिनिधित्व का प्रश्न प्रक्रिया का हिस्सा, मूल वाद पर जारी रहेगी न्यायिक लड़ाई
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई हुई । इस दौरान एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने संकेत दिया कि भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों की ओर से मुकदमा लड़ने के प्रतिनिधित्व से जुड़े मामले को दोबारा इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा जा सकता है।
हालांकि, इस संबंध में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं हुआ और सुनवाई करीब दो सप्ताह के लिए टाल दी गई।
हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने बताया कि

सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति मुख्य रूप से इलाहाबाद हाईकोर्ट के जुलाई 2025 के आदेश को लेकर रही। हाईकोर्ट ने सूट नंबर 17 के वादियों को भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों के लाभ के लिए प्रतिनिधि क्षमता में मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। इसी आदेश को सूट नंबर एक के वादियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
नोटिस नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट को सूट नंबर एक के वादियों को स्पष्ट रूप से नोटिस देना चाहिए था कि वह भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के प्रतिनिधित्व के प्रश्न पर निर्णय करने जा रहा है। पीठ ने मौखिक रूप से यह भी टिप्पणी की कि सूट नंबर 17 में दाखिल आवेदन का विषय कुछ और था, जबकि हाईकोर्ट ने उससे आगे जाकर प्रतिनिधित्व का निर्णय कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद संकेत मिले हैं कि प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर दोबारा हाईकोर्ट में सुनवाई हो सकती है।
महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया अहम कानूनी पड़ाव
हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने कहा कि प्रतिनिधित्व का प्रश्न मुकदमे की प्रक्रिया से जुड़ा विषय है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित मूल विवाद पर हिंदू पक्ष की कानूनी लड़ाई अपने स्थान पर जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि न्यायालय के समक्ष पक्षकारों के अधिकार और दावों का विधि के अनुसार परीक्षण होना महत्वपूर्ण है।

उनके अनुसार, प्रतिनिधि क्षमता को लेकर यदि प्रक्रिया संबंधी कोई कमी सामने आई है तो उसे विधिक प्रक्रिया के तहत दूर किया जा सकता है। इससे श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मूल दावे पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
पिछली सुनवाई में विभिन्न पक्षों के बीच विवादित स्थल को लेकर संभावित समझौते पर बातचीत होने की बात अदालत के समक्ष रखी गई थी। बुधवार को पीठ ने अन्य पक्षों से भी इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने को कहा।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद से संबंधित 18 मुकदमे इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित हैं। इनमें 15 मुकदमों को एक साथ जोड़कर सुनवाई की जा रही है, जबकि अन्य मुकदमे अलग सूचीबद्ध हैं। सूट नंबर 17 भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से ‘नेक्स्ट फ्रेंड’ के माध्यम से दाखिल किया गया था।
जुलाई 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मुकदमे के वादियों को भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों के लाभ के लिए प्रतिनिधि क्षमता में मुकदमा चलाने की अनुमति दी थी। इसी आदेश को सूट नंबर एक के वादियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
अब अगली सुनवाई पर टिकी नजर
बुधवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम आदेश नहीं दिया। पीठ ने मामले को करीब दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया है। अब अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि प्रतिनिधित्व का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट स्वयं तय करता है अथवा इसे आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस भेजा जाता है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद की कानूनी लड़ाई में सुप्रीम कोर्ट का यह रुख फिलहाल प्रतिनिधित्व के प्रश्न तक सीमित है। मूल विवाद पर न्यायालय की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है।








