मानवता की मिसाल बना ‘प्रोजेक्ट लाडो’, दो जरूरतमंद बेटियों का सम्मानपूर्वक कराया कन्यादान

अंकिता शर्मा, सदस्य स्ट्रेंजर फ्रेंड्स हैल्पिंग हैंड्स सोसाइटी

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मथुरा। सामाजिक सरोकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता निभाते हुए स्ट्रेंजर फ्रेंड्स हैल्पिंग हैंड्स सोसाइटी (SF NGO) मथुरा ने अपने “प्रोजेक्ट लाडो” के तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की दो बेटियों तनु और डॉली के विवाह में सहयोग कर मानवता की प्रेरणादायी मिसाल पेश की। संस्था ने दोनों बहनों को गृहस्थी का आवश्यक सामान और आर्थिक सहयोग प्रदान कर उनके नए जीवन की शुरुआत को सहज और सम्मानजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संस्था के संस्थापक पियूष बंसल ने कहा कि प्रत्येक बेटी को सम्मानपूर्वक विदा करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। आर्थिक अभाव किसी बेटी के सपनों में बाधा न बने, इसी उद्देश्य से संस्था जरूरतमंद परिवारों की पहचान कर उनके विवाह में सहयोग करती है।

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की अध्यक्षा एवं दिशा फैशन इंस्टिट्यूट की डायरेक्टर शिखा बंसल ने टीम के साथ विवाहोपयोगी सामग्री भेंट की। इसमें राशन, ड्रेसिंग टेबल, कूलर, सिलाई मशीन, स्टील की टंकी, गैस स्टोव, प्रेस, कुकर, पंखा, बर्तन, साड़ियाँ, वर-वधू के वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, बेडशीट, कंबल, इलेक्ट्रॉनिक केटल सहित अन्य घरेलू उपयोग का सामान और सहयोग राशि शामिल रही।

संस्था के वरिष्ठ सदस्य भारत अग्रवाल ने कहा कि समाज के सहयोग से ही ऐसे सेवा कार्य संभव हो पाते हैं। जरूरतमंद बेटी के विवाह में सहयोग करना सबसे बड़ा सामाजिक दायित्व और पुण्य का कार्य है।

इस अवसर पर सद्भावना चैरिटेबल ब्लड बैंक के संस्थापक संजीव ने भी सहयोग प्रदान करते हुए कहा कि सक्षम लोगों को आगे आकर ऐसे सेवा कार्यों में भागीदारी निभानी चाहिए, क्योंकि किसी जरूरतमंद परिवार की बेटी के चेहरे पर मुस्कान लाने से बड़ा कोई दान नहीं हो सकता।

संस्था की वरिष्ठ सदस्या अंकिता शर्मा ने बताया कि “लाडो का कन्यादान” अभियान के अंतर्गत विवाह से पहले परिवार की स्थिति का सत्यापन किया जाता है। इसके बाद समाज के सहयोग से आवश्यक सामग्री जुटाकर बेटियों के विवाह में सहायता उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह अभियान भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगा।

कार्यक्रम में रजनी, रंजना, मीनल, नेहा मित्तल, अंजली, कृतिका, अनिल, भोला सिंह सहित संस्था के अनेक सदस्य एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।

अंत में संस्था ने समाज से अधिक से अधिक लोगों को “लाडो का कन्यादान” अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि समाज मिलकर आगे आए, तो कोई भी बेटी अपने विवाह के दिन स्वयं को असहाय महसूस नहीं करेगी। संस्था का संदेश था— “रिश्तों का नाम जरूरी नहीं होता, कुछ बेनाम रिश्ते भी किसी की जिंदगी बदल देते हैं।”