डॉक्टर दीपक गोस्वामी, मानवीय व्यवहार वैज्ञानिक मथुरा
विश्व हास्य दिवस के अवसर पर जैंत स्थित खुशी नशा मुक्ति केंद्र में आयोजित एक विशेष कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल दवाओं से नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती, सकारात्मक सोच और खुशहाल वातावरण से जीती जा सकती है। कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक संस्था आदर्श संस्कार शाला एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मथुरा के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
कार्यशाला में मानवीय व्यवहार वैज्ञानिक डॉ. दीपक कुमार गोस्वामी ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा, “जिंदगी के हजार गम की एक ही दवाई है—थोड़ा हंसना और मुस्कुराना। ईश्वर ने खुशियों की पोटली सभी के लिए खोली है, बस उसे अपनाने की जरूरत है।” उन्होंने जोर दिया कि नशे से मुक्ति पाने के लिए मानसिक और वैचारिक रूप से मजबूत होना जरूरी है, क्योंकि नशा सामाजिक कुरीतियों का ऐसा “महादानव” है जो व्यक्ति और समाज दोनों को कमजोर करता है।
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कार्यक्रम का नया पहलू यह रहा कि प्रतिभागियों को पारंपरिक व्याख्यान के बजाय मनोवैज्ञानिक तरीकों से जोड़ा गया। खेल, गीत और नाट्य अभ्यासों के माध्यम से उन्हें आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा विकसित करने की प्रेरणा दी गई। इससे प्रतिभागियों में नशा छोड़ने के प्रति जागरूकता के साथ-साथ व्यवहारिक बदलाव की भावना भी विकसित हुई।
परा विधिक स्वयंसेवक उमाशंकर शर्मा ने बताया कि प्राधिकरण द्वारा “नशे के विरुद्ध महाअभियान” चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य नशे के आदी लोगों को समझाकर, मार्गदर्शन देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने यह भी बताया कि जरूरतमंद लोग टोल फ्री नंबर 15100 या नालसा ऐप के माध्यम से विधिक सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में करीब 70 प्रतिभागियों ने नशा छोड़ने और समाज की मुख्यधारा में जुड़ने की शपथ ली। खुशी नशा मुक्ति केंद्र के प्रभारी अश्विनी कुमार पांडेय ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल प्रतिभागियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
कार्यशाला ने यह स्पष्ट कर दिया कि नशा मुक्ति की राह में हंसी, संवाद और सहयोग की शक्ति किसी भी दवा से कम नहीं है।








