श्रीकृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति गांव गांव आरंभ हुई डिजीटल सभाएं

मनोज चौधरी

 

वीडियो कॉन्फ्रेंस से जनजागरण, ग्वाल-बाल व गोपी टोलियों का गठन, आंदोलन को मिल रहा जनसमर्थन

स्क्रीन पर दिखाया जा रहा श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर का इतिहास

 

मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मूल गर्भगृह की मुक्ति और वहां भव्य मंदिर निर्माण के संकल्प को लेकर चल रहा आंदोलन अब गांवों की चौपालों तक निर्णायक रूप में पहुंचने लगा है। हिंदू पक्षकार एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवकोट के नेतृत्व में हाईकोर्ट की कानूनी लड़ाई के साथ-साथ जमीनी स्तर पर जन आंदोलन को धार दी जा रही है।

आंदोलन के तहत गांवों में स्क्रीन लगाकर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से लोगों को सीधे संबोधित किया जा रहा है। इन डिजिटल सभाओं में श्रीकृष्ण जन्मभूमि के इतिहास, 1670 में मंदिर विध्वंस और मूल गर्भगृह स्थल पर बनी संरचना से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट रूप से रखा जा रहा है। ग्रामीण बड़ी संख्या में इन कार्यक्रमों से जुड़ रहे हैं और आंदोलन की जानकारी प्राप्त कर रहे हैं।

महेंद्र प्रताप सिंह एडवकोट ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से कहा कि यह संघर्ष केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जन-जन की चेतना से आगे बढ़ेगा। इसी उद्देश्य से गांव-गांव ग्वाल-बाल और गोपी टोलियों का गठन किया जा रहा है, ताकि युवाओं, बच्चों और महिलाओं को संगठित कर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के अभियान से जोड़ा जा सके।

उन्होंने कहा कि विदेशी मुगल आक्रांताओं द्वारा सनातन आस्था पर किए गए आघात और जजिया कर जैसे अत्याचारों का इतिहास नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि समाज अपने सांस्कृतिक अधिकारों को समझ सके। वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से यह संदेश दूर-दराज के गांवों तक बिना किसी बाधा के पहुंच रहा है।

हाल ही में तारसी, मधुवन और कुमुदवन सहित कई गांवों में स्क्रीन के माध्यम से आयोजित कार्यक्रमों में ग्रामीणों ने खुलकर आंदोलन का समर्थन किया। लोगों ने ग्वाल-बाल और गोपी टोलियों में शामिल होकर अभियान को तेज करने का संकल्प लिया।

आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण का अभियान बन चुका है। गांवों से उठ रही यह आवाज आने वाले समय में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन को नई दिशा और नई ताकत देगी।