रामकथा मंच से भरी श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति की हुंकार
महेन्द्र प्रताप सिंह एडवोकेट बोले—अब याचना नहीं, रण होगा
कोटवन (मथुरा):
ठाकुर बृजभूषण जी महाराज मंदिर, कोटवन में महंत श्री माध्वाचार्य जी महाराज की

अगुवाई और मौनी बाबा के सानिध्य में चल रही श्रीरामकथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन का स्वर तेज हो गया। कथा पंडाल में पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही ईदगाह मस्जिद प्रकरण के मुख्य याचिकाकर्ता एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेन्द्र प्रताप सिंह एडवकोट ने ऐतिहासिक तथ्यों का उल्लेख करते हुए मुगल आक्रांताओं द्वारा श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को तोड़े जाने और भगवान श्रीकृष्ण के विग्रहों को खंडित किए जाने का प्रसंग साधु-संतों के समक्ष रखा।
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उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के विग्रहों को तोड़कर आगरा की जामा मस्जिद में लगवाया गया, यह इतिहास के पन्नों में दर्ज है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि और आगरा जामा मस्जिद से जुड़े दोनों ही मुकदमे वह स्वयं न्यायालय में लड़ रहे हैं। महेन्द्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने विश्वास जताया कि साधु-संतों के आशीर्वाद से श्रीकृष्ण जन्मभूमि अवश्य मुक्त होगी और मूल गर्भगृह स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण होगा।
मंच से हजारों श्रद्धालुओं को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा कि हम मूल गर्भगृह स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण करवा कर रहेंगे, दुनिया की कोई भी शक्ति हमें रोक नहीं सकती। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ कट्टरपंथी लोगों की ओर से धमकियां दी गईं, लेकिन हमारा संकल्प अडिग है—अब याचना नहीं, रण होगा। उनके इस उद्बोधन से खचाखच भरे पंडाल में जोश भर गया और श्रद्धालुओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ समर्थन जताया।

कार्यक्रम में गुजरात, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश सहित विभिन्न प्रांतों से पहुंचे संत-महात्माओं ने भी श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास की मांग का समर्थन किया। कथा समापन के बाद मौनी बाबा की कुटिया में संतों के साथ करीब आधे घंटे तक इस मुद्दे पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ।
इस अवसर पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्रपुरी जी महाराज, जगद्गुरु शंकराचार्य जगन्नाथ मंदिर अहमदाबाद के दिलीप देव, निर्मोही अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष राजेंद्र दास जी महाराज, राजकोट के नृसिंह दास, निर्मोही अन्नी अखाड़ा अयोध्या के अध्यक्ष रामदास जी महाराज, वैष्णव सम्राट श्री महंत श्यामसुंदर दास सहित अनेक संतों ने मंदिर निर्माण को लेकर देशभर में अलग-अलग स्तर पर चल रहे आंदोलनों को और गति देने पर बल दिया।








