मोहित विश्वकर्मा, वृंदावन से
इस्कॉन गोशाला में भागवत कथा के समापन पर जन्मभूमि आंदोलन को मिला समर्थन
श्रीकृष्ण जन्मभूमि के इतिहास की परिचय पुस्तिका भी वितरित की

भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य स्थल यानी मूल गर्भगृह पर भव्य मंदिर निर्माण की मांग को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से चल रहे श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन को वृंदावन में व्यापक समर्थन मिला। इस्कॉन गोशाला में आयोजित भागवत कथा के अंतिम दिन देशी-विदेशी भक्तों ने आंदोलन के उद्देश्य के प्रति अपनी सहमति और समर्थन व्यक्त किया। इस मौके पर श्री कृष्ण जन्मभूमि के इतिहास की परिचय पुस्तिका भी वितरित की गई।

इस्कॉन गोशाला वृंदावन में इस्कॉन के राधेश्यामानंद जी महाराज की भागवत कथा के समापन अवसर पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि–शाही ईदगाह मस्जिद प्रकरण के हिंदू पक्षकार एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट उपस्थित रहे। व्यास गद्दी से उनका परिचय कराते हुए राधेश्यामानंद जी महाराज ने जन्मभूमि आंदोलन को धर्म और आस्था से जुड़ा विषय बताते हुए इसमें अपना समर्थन व्यक्त किया।
महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस पवित्र स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ था, उसी स्थान पर वर्ष 1670 में मुगल शासक औरंगजेब द्वारा मस्जिद का निर्माण कराया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मूल गर्भगृह स्थल पर पुनः मंदिर निर्माण के लिए उनका संघर्ष पूरी तरह कानूनी और शांतिपूर्ण मार्ग से चल रहा है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से संवाद करते हुए श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के दर्शन से जुड़े प्रश्न किए, जिस पर बड़ी संख्या में भक्तों ने अपनी आस्था प्रकट की। इसके बाद मूल गर्भगृह स्थल पर मंदिर निर्माण की मांग पर उपस्थित भक्तों ने एकमत होकर समर्थन जताया।
न्यास के अध्यक्ष ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति केवल एक कानूनी मामला नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और न्याय से जुड़ा विषय है। उन्होंने भक्तों से इस उद्देश्य को समाज के प्रत्येक हिंदू तक पहुंचाने का आह्वान किया और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के बैनर तले चल रहे आंदोलनों की जानकारी दी।
कार्यक्रम के अंत में महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने राधेश्यामानंद जी महाराज को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर संत श्यामानंद जी महाराज भी और हजारों की संख्या भक्तों उपस्थित रहे। सभी ने श्री कृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति का संकल्प लिया।








