दीपों से जगमग हुई अयोध्या तो फिर मथुरा क्यों रहे अंधेरी ?

मथुरा | रिपोर्ट : मनोज चौधरी

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अयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर बनकर दीपोत्सव का दीप जगमगा रहा है, तो हिंदुओं में यह सवाल उठना स्वाभाविक है— मथुरा में श्रीकृष्ण का प्राकट्य स्थल अब भी अंधेरे में क्यों डूबा है?

जहां एक ओर अयोध्या ने अपनी आस्था का इतिहास लौटा लिया, वहीं श्रीकृष्ण जन्मभूमि अब भी न्याय और मुक्ति की राह देख रही है। 

श्रीकृष्ण जन्मभूमि भूमि और शाही ईदगाह मस्जिद मथुरा

भगवान श्रीकृष्ण के परपोते राजा वज्रनाभ ने करीब पांच हजार वर्ष पूर्व उनके प्राकट्य स्थल पर मंदिर का निर्माण कराया था।

मगर इतिहास गवाह है— महमूद गजनवी से लेकर औरंगजेब तक, चार बार यह मंदिर ध्वस्त हुआ और हर बार बृजवासियों ने अपने श्रम, श्रद्धा और बलिदान से उसे पुनः खड़ा किया।

1670 में औरंगजेब ने मंदिर गिराकर उसी स्थान पर मस्जिद बनवाई, जिसके साये में आज भी जन्मभूमि की पवित्र भूमि दबकर मौन खड़ी है।

महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट हिंदू पक्षकार श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस

अब वही मौन तोड़ने निकले हैं महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट, जिन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि की ढाई एकड़ भूमि पर बनी मस्जिद को हटाकर पुनः मंदिर निर्माण की कानूनी पहल की है।

वर्ष 2020 में दायर मुकदमे ने मथुरा से लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट तक अपनी गूंज पहुंचाई। इसके साथ ही महेंद्र प्रताप सिंह ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास का गठन किया, जो इस संघर्ष को एक जनआंदोलन का रूप दे रहा है।

“आ गए हैं अवध बिहारी, अब आएंगे कृष्ण मुरारी” — यह नारा अब आंदोलन की पहचान बन चुका है।

वृंदावन में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय धर्म संसद में देश-विदेश के संतों ने इस मांग पर अपनी सहमति दी, और जनवरी 2025 में शुरू हुए छह करोड़ लोगों के हस्ताक्षर अभियान ने यह साबित कर दिया कि हिंदू समाज अब मथुरा की मुक्ति के लिए भी उतना ही संकल्पित है जितना अयोध्या के लिए था।

देश के प्रमुख तीर्थस्थलों से उठ रही हिंदू चेतना यात्राएं, संतों की अगुवाई में निकले चलो गांव की ओर अभियान, और ब्रज परिक्रमा मार्ग से गुजरती भक्ति चेतना रथ यात्राएं अब समाज को जोड़ने का कार्य कर रही हैं।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट मध्य में जर्मनी के संत परम अद्वैत जी महराज और वृंदावन के प्रमुख संत श्यामानंद जी महाराज

हर चौपाल पर एक ही प्रश्न गूंज रहा है—

“अयोध्या में राम लौटा, तो मथुरा में कृष्ण क्यों नहीं?”

महेंद्र प्रताप सिंह का कहना है—

संत मुरारी बापू को श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस और आंदोलन की जानकारी देते श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट

“यह केवल अदालत का मामला नहीं, बल्कि हिंदू स्वाभिमान का प्रश्न है।

जब तक श्रीकृष्ण का जन्मस्थान मुक्त नहीं होगा, तब तक ब्रज की आत्मा अधूरी रहेगी।”

हाल के वर्षों में इस आंदोलन ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है।

संत समाज से लेकर प्रवासी भारतीय संगठन तक, सब इस मुहिम से जुड़ रहे हैं।

महाकुंभ में हुए महासंवाद में संतों ने स्पष्ट कहा — “मथुरा की मुक्ति अब समय की मांग है।”

भारत रक्षा मंत्र के राष्ट्रीय अधिवेशन को संबोधित करते श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट

पर सवाल यही है—

क्या मथुरा फिर से अपने भगवान के प्राकट्य स्थल पर दीप जलते देख पाएगी?