भैया दूज का पर्व, विश्रामघाट पर उमड़ेंगे लाखों श्रद्धालु
भैया दूज के पावन अवसर पर बुधवार 22 अक्टूबर 2025 को यमुना स्नान का विशेष महत्त्व रहेगा। परंपरा के अनुसार इस दिन बहनें अपने भाइयों की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए यमुना तट पर स्नान कर पूजा-अर्चना करेंगी। ब्रज के केंद्र मथुरा के विश्रामघाट पर लाखों भाई-बहन यमुना में स्नान करने पहुंचेंगे। प्रशासन ने सुरक्षा, स्वच्छता और यातायात के विशेष इंतजाम किए हैं। घाटों को दीपों और पुष्पों से सजाया गया है। श्रद्धालु सूर्योदय से पहले ही यमुना तट पर पहुँचने लगते हैं और ‘जय यमुने मईया की’ के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।
संत पंडित श्यामानंद जी महाराज
🕉️ पौराणिक मान्यता
शास्त्रों के अनुसार यमुना, यमराज की बहन हैं। मान्यता है कि यमुना ने यमराज से वरदान प्राप्त किया था कि जो भी व्यक्ति श्रद्धा से यमुना में स्नान करेगा, उसे यमलोक नहीं जाना पड़ेगा। इसी कारण कहा जाता है —
“यमुना भक्तों से डरते हैं यम के दूत।”
🌺 भैया दूज का महत्व
दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाने वाला भैया दूज, भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक पर्व है। इस दिन बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसके सुख और दीर्घायु की कामना करती हैं। यमुना स्नान को इस दिन सबसे पुण्यदायी माना गया है।
🌄 उद्गम स्थल: यमुनोत्री
यमुना नदी का उद्गम उत्तराखंड के टिहरी-गढ़वाल ज़िले में स्थित यमुनोत्री धाम से होता है। यह नदी हिमालय की बंदरपुच्छ चोटी (20,731 फीट) के ‘कलिंद’ नामक भाग से निकलती है। इसी से इसका नाम ‘कालिंदी’ पड़ा। गंगा के समानांतर बहते हुए यह नदी प्रयागराज में जाकर गंगा से मिल जाती है।
📖 ब्रज संस्कृति में यमुना
ब्रजमंडल की एकमात्र प्रमुख नदी यमुना को श्रीकृष्ण की परम भक्त माना गया है। गंगा जहाँ ज्ञान की प्रतीक हैं, वहीं यमुना भक्ति की। ब्रजभाषा कवियों और वल्लभ सम्प्रदाय के भक्तों ने यमुना की स्तुति में अनेक रचनाएँ की हैं। यमुना स्तुति, ब्रजभक्ति काव्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
🪔 श्रद्धा का प्रवाह
यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि भक्ति, प्रेम और आस्था की पवित्र धारा है। कहा जाता है — जो यमुना में डुबकी लगाता है, वह केवल जल में नहीं, मोक्ष की राह में स्नान करता है।