पहले जातिसूचक टिप्पणी, फिर हत्या कर फेंका शव, अब उम्रकैद की सजा

मनोज चौधरी,

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मथुरा की विशेष अदालत ने 16 साल पुराने हत्या के मामले में सुनाया फैसला, आरोपी को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा

एक तरफ़ जातिसूचक टिप्पणी, फिर धमकी और अंत में बेरहमी से हत्या। हत्या के बाद शव को ठिकाने लगाने की कोशिश। लेकिन कानून के लंबे हाथों से न्याय आखिर जीत गया। 16 साल पुराने इस जघन्य हत्याकांड में अब मथुरा की अदालत ने दोषी को उम्रकैद की सजा सुना दी है।

थाना गोवर्धन क्षेत्र के ग्राम अडींग में वर्ष 2009 में दर्ज इस दिल दहला देने वाले मामले में आरोपी कुमरो उर्फ कुमर सिंह पुत्र हरी सिंह को आजीवन कारावास और ₹13,000 का आर्थिक दंड सुनाया गया है।

यह फैसला विशेष एससी/एसटी एक्ट न्यायालय (एडीजे), मथुरा के न्यायाधीश अजयपाल सिंह ने 30 सितंबर 2025 को साक्ष्यों के आधार पर सुनाया।

क्या था मामला?

साल 2009 में गोवर्धन थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक व्यक्ति को जातिसूचक गालियां दी गईं, धमकी दी गई और कुछ ही दिनों बाद उसकी हत्या कर शव को फेंक दिया गया।

इस मामले में मुकदमा मु.अ.सं. 354/2009, धारा 302, 201, 506 भादवि व 3(2)5 एससी/एसटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया था।

 16 साल लड़ी कानूनी लड़ाई

लंबे समय तक चली सुनवाई, गवाहों के बयान, और पुलिस द्वारा जुटाए गए ठोस सबूतों के आधार पर अदालत ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

 

पुलिस और अभियोजन की भूमिका यहां निर्णायक रही। गुणवत्तापूर्ण विवेचना, समयबद्ध चार्जशीट और प्रभावी पैरवी ने मामले को मजबूती दी, जिसके परिणामस्वरूप अदालत ने आरोपी को आजन्म कारावास की सजा दी।

 

पुलिस की सतर्कता बनी इंसाफ की कुंजी

 

इस फैसले में मथुरा पुलिस की सख्त निगरानी और तत्परता ने अहम भूमिका निभाई। विवेचना के हर पहलू को साक्ष्य के रूप में संकलित किया गया। वहीं, उच्च पुलिस अधिकारियों द्वारा लगातार की जा रही निगरानी और समीक्षा ने इस मुकदमे को अदालत तक मजबूती से पहुंचाया।