डीएपी के चक्कर में टूटा महिला किसान का पौंहचा

दिलीप यादव, वरिष्ठ पत्रकार

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डीएपी के चक्कर में टूटा महिला किसान का पौंहचा

-पति की गैर मौजूदगी में अड़ींग समिति पर खाद लेने गई थी महिला

-हंसते रहे किसान, कर्मचारी बोले कहां मर गया खसम

पीड़ित महिला

अड़ींग। डीएपी खाद की एक बोरी लेने को लाइन में लगी 55 वर्षीय महिला किसान बिल्ला के दांये हाथ में फ्रेक्चर हो गया। भीड़ के दबाव के चलते महिला को खाद की पर्ची भी नहीं मिली।

 

वाकया मंगलवार को क्षेत्रीय सहकारी समिति अड़ींग पर घंटा। लाइन में लगे किसान महिला के चोटिल होने पर हंसते रहे। उधर महिला का आरोप है कि बैंक कर्मचारी ने यहां तक बोल डाला कि तेरा खसम कहां मर गया। महिला ने भी पलटकर कहा कि कोई मर गया है, उसको फिरने गया है ‌।

किसान डालचंद की पत्नी बिल्ला पति के बाहर किसी काम से चले जाने के कारण चालू सीजन में समिति पर बीते दिनों आए खाद के वितरण की जानकारी होने पर खाद पाने वालों की लाइन में जा लगी‌ । समिति के सीमित स्थान में बांस की बैरीकेडिंग व पुलिस बल की मौजूदगी के बाद भी सैकड़ों किसानों से समिति परिसर खचाखच भर गया। समिति पर एक किसान को केवल एक बोरा डीएपी देने की घोषणा से किसानों में आक्रोश था। आफरा तफरी के माहौल में बिल्ला को धक्का मुक्की के चलते हाथ में मोच आ गई। दीवार के किनारे खड़ी बिल्ला भिंच गयी और पौंहचे पर से हड्डी टूट गई। महिला के चीखने चिल्लाने पर लाइन में लगे ज्यादातर किसान हंसते रहे। कराहती महिला किसान की मानें तो हद तो तब हो गई जब एक कर्मचारी ने शोर सुनकर महिला की हालत देखी और बोला कि तेरा खसम कहां मर गया जो तू खाद लेने आई है। महिला ने भी करारा जबाब दिया कि कोई मर गया है उसी को रोने गये हैं। हाथ में ज्यादा चोट के चलते महिला किसान को बगैर खाद के ही वापस आना पड़ा। पति ने लौटकर एक्स-रे कराया जिसमें फ्रेक्चर की पुष्टि हो गई ‌।