मथुरा, 14 सितंबर । पेट्रोलियम वर्कर्स यूनियन के नेतृत्व में रिफाइनरी के सैकड़ों मजदूर अपनी हस्तक्षेप याचिका लेकर सासंद हेमा मालिनी जी के सिविल लाइंस ऑफिस पहुंचे । तहसील सदर से उनके कार्यालय तक
अनुशासित और पंक्तिबद्ध श्रमिक रिफाइनरी प्रबंधन के विरुद्ध नारे लगाते हुए गए ।
सांसद हेमा मालिनी जी अनुपस्थित थीं और उनका कोई प्रतिनिधि भी याचिका ग्रहण करने को उपस्थित नहीं था । इससे श्रमिकों को
क्षोभ हुआ और याचिका की एक प्रति इमारत के मुख्य द्वार पर चस्पा कर दी गई । हस्तक्षेप याचिका में सांसद महोदया से मार्मिक अपील करते हुए यूनियन ने आधुनिक मंदिर मथुरा रिफाइनरी की शुचिता बहाल करने के लिए पारिश्रमिक की अवैध वापसी पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की । याचिका में रिफाइनरी के ठेकेदारों और अधिकारियों के अपवित्र गठजोड़ का जिक्र करते हुए कहा गया है कि पूर्ववर्ती आश्वासनों के बाबजूद कार्यकारी निदेशक सेवा सुरक्षा का तन्त्र विकसित नहीं कर रहे हैं तो निश्चित ही इस महा अपराध में उनकी सम्मति होगी । इस अवसर पर वरिष्ठ मजदूर नेता शिवदत्त चतुर्वेदी ने मजदूरों की सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पूर्व में सभी लोकसभा सदस्यों और राज्य सभा सदस्यों को यूनियन अपनी समस्या से अवगत करा चुकी है लेकिन प्रबंधन के कान पर जू नहीं रेंगी है । उन्होंने सांसद हेमा मालिनी का आह्वान किया कि वे सांस्कृतिक राग रंगों से निकल कर मथुरा के मजदूरों और किसानों के सवालों पर ध्यान दें । उन्होंने कहा कि अवैध पारिश्रमिक वापसी ने रिफाइनरी को काले धन के सृजन की फैक्ट्री बना दिया है जिससे समाज और राष्ट्र की अपूरणीय क्षति है ।
यूनियन के अध्यक्ष मधुवन दत्त चतुर्वेदी एडवोकेट ने हस्तक्षेप याचिका का मूल पाठ पढ़कर सुनाया और कहा कि इसकी प्रति भी सभी लोकसभा सदस्यों एवं राज्य सभा सदस्यों को भेजी जाएगी कि वे भी हेमा मालिनी से , केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री, आईओसीएल चेयरमैन और श्रम मंत्रालय से इस समस्या के निराकरण की पहल करें ।








