मनोज चौधरी
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दो दिन बाद ब्रज धर्म धरा पर श्रीकृष्ण की प्राणसखी राधे का प्राकट्योत्सव है। बरसाना में श्रीकृष्ण संग राधे तो रावल में कान्हा की राधे। यमुना की खादर में अकेली राधे। हर जगह गोरी राधे तो खादर की श्यामल राधे।

राधे-राधे, श्याम मिलादे की प्रार्थना के भावपूर्ण शब्द ब्रज भूमि पर आए हर आस्थावान के मुख से स्वतः फूट रहे हैं। श्रद्धालुओं की आस्था का मुख्य केंद्र बरसाना बना हुआ है। रावल भी बहुत कम दर्शनार्थी हैं। मगर, मांट तहसील की पानी गांव पंचायत की खादर भूमि में राधा आज भी अकेली हैं।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि शाही ईदगाह मस्जिद के मुकदमा के हिन्दू पक्षकार एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने बताया कि ब्रज के सभी मंदिरों में श्री राधा के विग्रह के साथ भगवान श्री कृष्ण का भी विग्रह विराजमान है। मगर यहां राधारानी का अकेला ही विग्रह है। महत्वपूर्ण यह है कि राधाजी के जहां भी विग्रह विराजमान हैं, वह सभी गोरे हैं, पर यहां के विग्रह श्यामल है।
मंदिर के महंत नीरज शर्मा बताते हैं कि महारास में गोपी रूप में आए भोलेनाथ को कृष्ण जो सम्मान दिया। उससे राधा रूठ गई। क्रोध की ज्वाला से उनका रंग श्यामल हो गया। वह इतनी रोई, उसी स्थल पर राधाजी के अश्रुओं से एक विशाल सरोवर बन गया। इसे आज मानसरोवर के नाम से पुकारा जाता है। यह एक पवित्र स्थान है।

आज यहां पर गैर जिले के इक्का दुक्का श्रद्धालु नजर आ रहे हैं, जबकि बरसाना तो राधारानी के भक्तों के लिए ब्रज संस्कृति के रंग में रंगने लगी है। मंदिर से लेकर बरसना के हर मुहल्ले गली को सजाने संवारने का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। डीएम चंद्र प्रकाश सिंह और एसएपी श्लोक कुमार अपनी अपनी टीम के साथ अधिकांश वक्त बरसाना में ही गुजर रहे हैं।








