भारत के विभाजन पर लगी मथुरा में प्रदर्शनी

*विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर कलेक्ट्रेट सभागार में लगी ऐतिहासिक प्रदर्शनी।*

*माननीय सांसद श्री तेजवीर सिंह जी ने फीता काटकर किया प्रदर्शनी का उद्घाटन।*

*माननीय सांसद जी एवं विस्थापित परिवारों के सदस्यों ने देखी प्रदर्शनी।*

*भारत विभाजन की स्मृतियों से रूबरू हुआ मथुरा, प्रदर्शनी में उमड़ी भारी भीड़, भावुक हुए लोग*

*विभाजन की त्रासदी को दर्शाती 52 पोस्टर की विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का किया आयोजन*

*2 मिनट का रखा गया मौन*

*मथुरा 14 अगस्त 2025/* देश के इतिहास के सबसे दर्दनाक और हृदयविदारक अध्यायों में से एक, भारत विभाजन की त्रासदी को स्मरण कर, उसके पीड़ादायक परिणामों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से आज जनपद मथुरा में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया गया।
इस अवसर पर कलेक्ट्रेट सभागार में विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी का आयोजन किया गया,

 

जिसका उद्घाटन माननीय सांसद श्री तेजवीर सिंह जी द्वारा फीता काटकर किया गया। माननीय सांसद जी, मुख्य विकास अधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक,

 

जिला पंचायत राज अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक डीआरडीए, डीसी मनरेगा, जिला सूचना अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी सहित कलेक्ट्रेट में आए विस्थापित परिवारों के सदस्यों द्वारा प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया। सभी लोगों ने राजकीय संग्रहालय द्वारा विभाजन से संबंधित लगाई गई पुस्तकों का भी अवलोकन किया।
प्रदर्शनी में विभाजन काल के दुर्लभ चित्र, दस्तावेज़ और 52 पृष्ठों के विस्तृत पोस्टरों के माध्यम से उस त्रासदी का मार्मिक चित्रण किया गया, जिसे देखकर उपस्थित जनमानस भावुक हो उठा। माननीय सांसद जी एवं मुख्य विकास अधिकारी ने प्रदर्शनी में दर्शाए गए चित्रों का सूक्ष्मता से अवलोकन।
माननीय सांसद जी ने सर्वप्रथम विस्थापित परिवारों के सदस्यों को पुष्प भेंटकर एवं शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। सम्मान समारोह के उपरान्त कलेक्ट्रेट सभागार में उपस्थित सभी लोगों ने 02 मिनिट का मौन रखा। कार्यक्रम में विभाजन से संबंधित फिल्म को दिखाया गया, जिसको देख कर सभी के आंखों में आँसू आ गए तथा लोग भावुक हो गए।
कार्यक्रम में माननीय सांसद जी ने कहा कि भारत विभाजन के समय नफरत और हिंसा की आग में लाखों निर्दोष लोग झुलसे, करोड़ों विस्थापित हुए और असंख्य परिवार बिछड़ गए। विभाजन किसी भी परिस्थिति में समाधान नहीं, बल्कि समस्याओं को जन्म देता है। हमें सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से एकजुट रहना चाहिए। यह घटना भारतीय सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक एकजुटता को गहरा आघात देने वाली थी। इसी स्मृति को सजीव करने और एकता, सामाजिक सद्भाव तथा मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने के लिए शासन स्तर पर इस दिवस का आयोजन किया जाता है।
उन्होंने विभाजन को भारतीय इतिहास का एक काला अध्याय बताते हुए कहा कि इसका गहरा आर्थिक और सामाजिक असर पड़ा, जिससे लाखों लोग विस्थापित हुए और असंख्य परिवारों को अपार पीड़ा सहनी पड़ी।
कार्यक्रम में विस्थापित परिवारों से हरीश भाटिया, जी0डी0 भाटिया, सौभाग्य भाटिया, मदनलाल भाटिया, लालचंद वाधवानी, जुगल किशोर भाटिया, अशोक भाटिया, अशोक चोपड़ा, प्रदीप भाटिया, नारायण दास लखानी, तुलसीदास गंगवानी, गुरुमुख दास गंगवानी, सुरेश, जामन दास लखानी, जितेन्द्र भाटिया, विजेन्द्र मेहता, हरीश भाटिया आदि उपस्थित रहे।