मनोज चौधरी, मथुराः सोशल मीडिया पर लूटपाट, रीसेलिंग पोर्टल पर ठगी और सेक्सटार्शन की ओर बढ़ते मेवात गिरोह की उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के त्रिसंधि इलाके में बनी फिशिंग राजधानी में घुसने के पुलिस के रास्ते धीरे-धीरे साफ होने लगे है। हाल ही में मथुरा पुलिस ने बरेली के नवाबगंज इलाके से कई ऐसे युवाओं को पकड़ा है, जो विभिन्न कंपनियों के एक्टिवेटेड सिमकार्ड साइबर अपराधियों को बेच रहे थे। इनसे कई कंपनियों की 380 सिम कार्ड भी पुलिस को मिले है। अब तक की पूछताछ में पुलिस को मेवात गिरोह के संबंध में कई अहम सुराग मिले है, जो कई साइबर अपराधियों को सलाखों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान की त्रिसंधि इलाका भरतपुर, डींग, पलवल और मथुरा जिले का बड़ा भू-भूभाग है। जो इन दिनों देश की फिशिंग राजधानी बन चुका है। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब, लिंक्डइन, टेलीग्राम और व्हाट्सएप तक नेटवर्किंग दुनिया फैली है। जिस जगह से आनलाइन ठगी करने के लिए मेवात गिरोह अपने शिकार को चारा डालते है, उसमें घुसने के लिए मथुरा पुलिस को एक बार फिर बरेली जिले के नवाबगंज इलाके से अहम सुराग मिला है। दो-तीन दिन पहले मथुरा पुलिस ने यहां से कई युवकों को भी उठाया है, जो विभिन्न कंपनियों की एक्टिवेटेड सिम कार्ड इसी त्रिसंधि इलाके में खपा रहे थे। इनके ग्राहक भी मेवात गिरोह के सदस्य थे। एक सिम कार्ड की इनको तीन हजार रुपये में दिया जा रहा था। सूत्रों के अनुसार, इन युवकों से पुलिस को देश की फिशिंग राजधानी इस त्रिसंधि इलाके में घुसने का रास्ता मिल गया है। हालांकि, पुलिस अभी इन युवकों को मीडिया के सामने नहीं लाई है। लेकिन पूछताछ में पुलिस को ये जानकारी मिली है कि एक्टिवेटेड सिम कार्ड बिना दस्तावेज के बेचने का काम ये युवक बड़े स्तर पर कर रहे थे। बिना दस्तावेज पर मिलने वाला यही एक्टिवेटेड सिम कार्ड साइबर अपराधियों की धोखाधड़ियों का मुख्य हथियार है। अब तक पूछताछ में पुलिस कई साइबर अपराधियों की जानकारी मिली है, जो इनके माध्याम से सिम कार्ड खरीद कर धोखाधाड़ी करने में संलिप्त है।








