हेड कांस्टेबल की हत्या में तीन को 20 वर्ष बाद आजीवन कारावास

मनोज चौधरी, आदित्य मंगल न्यूज

मथुरा शहर कोतवाली में सात जनवरी 2003 को मयूर विहार में लाठी-डंडे और हॉकी से मारपीट कर घायल किए गए हेड कांस्टेबल कामता प्रसाद की हत्या के मुकदमे का शनिवार को फैसला हो गया। 20 साल तक चली सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट हरेन्द्र प्रसाद के न्यायालय में तीन आरोपितों को दोषी ठहराया। तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

शासन की ओर से मुकदमा की पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद शर्मा ने बताया, 7 जनवरी को मयूर विहार में कस्बा फरह निवासी शिव सिंह, गली गंगा सिंह निवासी धीरज और किरारई निवासी लाखन सिंह ने पुलिस लाइन में रहने वाले हेड कांस्टेबल कामता प्रासाद की लाठी डंडे और हॉकी से पिटाई की। घटना की रिपोर्ट हेड कांस्टेबल के भतीजे दीपक ने कोतवाली में दर्ज कराई थी। तीनों के अलावा अन्य लोगों को भी घटना में नामजद किया गया था, लेकिन तत्तकालीन सीओ आलोक प्रियदर्शी ने जांच में उनको दोषी नहीं और धीरज, लाखन और शिव सिंह के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। 20 साल तक इस मुकदमा की हुई सुनवाई के बाद न्यायालय ने अपना फैसला दिया। विशेष लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद ने बताया कि इलाज के दरम्यान हेड कांस्टेबल की मृत्यु 11 फरवरी 2003 को आगरा के राम रघु अस्पताल में हुई थी।