छेड़छाड़ में पिता-पुत्र को हुई सजा, सात-सात हजार रुपये का अर्थ दंड भी

विक्रांत चौधरी, आदित्य मंगल न्यूज

विशेष लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद शर्मा

 

विशेष न्यायाधीश (एससी एसटी एक्ट) हरेंद्र प्रसाद के न्यायालय ने शुक्रवार को छेड़छाड़ के मामले में पिता-पुत्र को साढ़े तीन-तीन साल की सजा सुनाई है। दोनों दोषियों पर सात-सात हजार रुपये का अर्थदंड भी किया है। उनके जमानत के बंध पत्रों को निरस्त कर दोनों को सजा भुगतने के लिए जेल भेजा गया है।
थाना राया क्षेत्र के एक गांव के रहने वाले मोहन चंद द्रोण और उनके पुत्र आकाश ने 17 फरवरी 2012 में एक महिला के साथ अश्लील हरकत की। इसका विरोध करने पर पिता-पुत्र ने महिला के साथ मारपीट कर दी। जिसमें महिला के गंभीर चोटें आईं। पीड़ित अपनी पत्नी को लेकर पुलिस चौकी बिचपुरी गए, लेकिन पुलिस ने पीड़िता की रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इसको लेकर पीड़ित दंपती ने तत्कालीन एसएसपी को भी एक प्रार्थना पत्र दिया। जिस पर तत्कालीन थाना प्रभारी ने पीड़ित दंपती पर रिपोर्ट न लिखाने के लिए दबाव बनाया। और जबरन फैसला भी लिखवा लिया। उसके बाद आरोपितों ने पीड़ित दंपती को धमकना शुरू कर दिया। इससे परेशान होकर पीड़ित दंपती ने पुलिस उप महानिरीक्षक के यहां प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया।
पुलिस उप महानिरीक्षक के आदेश पर पुलिस ने 2 जून 2012 को घटना की रिपोर्ट थाना राया में दर्ज कर ली। इस मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश (एससी एसटी एक्ट) हरेंद्र प्रसाद के न्यायालय हुई। सहायक जिला

शासकीय अधिवक्ता राजू सिंह ने मुकदमा के फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि विशेष लोक अभियोजक सुरेश प्रसाद शर्मा ने अदालत में शासन की ओर से साक्ष्यों के साथ अपना पक्ष रखा। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद मोहन चंद द्रोण और उनके पुत्र आकाश को महिला से छेड़छाड़ कर मारपीट किए जाने का दोषी करार दिया। दोषी पिता-पुत्र को साढ़े तीन-साढ़े तीन साल की सजा सुनाई है। दोनों दोषियों पर सात-सात हजार रुपये का अर्थदंड भी किया है। उनके जमानत के बंध पत्रों को निरस्त कर दोनों को सजा भुगतने के लिए जेल भेजा गया है।