गर्मी में भी नहीं लौटे प्रवासी पक्षी, जोधपुर झाल बनी शरणस्थली

रामकुमार रौतेला, मथुरा

 


 

– मई के अंत तक जोधपुर झाल वेटलैंड पर दर्ज हुई शीतकालीन प्रवासी प्रजातियों की मौजूदगी

– अल नीनो के कारण बदली वायु धाराओं ने प्रभावित किया वापसी प्रवास

– विशेषज्ञों ने बताया— प्रवासी पक्षियों के ठहराव में बदलाव पर्यावरणीय असंतुलन का संकेत

 

मथुरा। यूरोप, साइबेरिया एवं मध्य एशिया के शीत प्रदेशों से सर्दियों में ब्रज आने वाले प्रवासी पक्षियों की अनेक प्रजातियाँ इस वर्ष गर्मी के मौसम में भी अपने मूल प्रजनन स्थलों की ओर वापस नहीं लौटी हैं। इन पक्षियों के लिए उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा विकसित जोधपुर झाल वेटलैंड सुरक्षित शरणस्थली बना हुआ है।

सामान्यतः सर्दियों में भारत आने वाले अधिकांश प्रवासी पक्षी अप्रैल के अंत तक उत्तरी क्षेत्रों की ओर वापसी कर जाते हैं, किंतु इस वर्ष मई के अंतिम सप्ताह तक लगभग 45 डिग्री सेल्सियस तापमान के बावजूद कई प्रवासी पक्षी जोधपुर झाल सहित उत्तर भारत के प्रमुख वेटलैंड्स में देखे गए हैं।

बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी (बीआरडीएस) द्वारा जोधपुर झाल वेटलैंड पर किए जा रहे पक्षी सर्वेक्षण के अनुसार ब्लैक-टेल्ड गोडविट, रफ, सिट्रिन वेगटेल, स्टिंट, कॉमन रेडशैंक, स्पॉटेड रेडशैंक तथा ग्रीनशैंक जैसी प्रजातियाँ अभी भी यहाँ मौजूद हैं। इनमें से कई प्रजातियाँ 10-10 से 12-12 पक्षियों के समूहों में देखी गई हैं।विदेशी पक्षियों की निरंतर मौजूदगी को देखते हुए वेटलैंड के सभी जलीय निकायों में जल प्रबंधन पर विशेष निगरानी रखी जा रही है, ताकि उनके लिए भोजन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।

बीआरडीएस के पक्षी विशेषज्ञ डॉ. के.पी. सिंह के अनुसार प्रवासी पक्षी अपनी लंबी यात्राओं के दौरान प्राकृतिक वायु धाराओं (विंड करंट) का उपयोग करते हैं। अनुकूल हवाएँ (टेलविंड) उनकी उड़ान को सुगम बनाती हैं, जबकि विपरीत दिशा से आने वाली हवाएँ (हेडविंड) यात्रा को कठिन बना देती हैं। उन्होंने बताया कि यदि वायु धाराओं का स्वरूप बदल जाए तो पक्षियों की प्रवास गति, ऊर्जा संतुलन तथा प्रजनन चक्र प्रभावित हो सकते हैं। वर्तमान स्थिति इसी प्रकार के व्यापक पर्यावरणीय परिवर्तन की ओर संकेत करती है।

डा. बी.आर. आंबेडकर विश्वविद्यालय की शोधार्थी निधि यादव के अनुसार अल नीनो के प्रभाव से वैश्विक स्तर पर वायु प्रवाह के पैटर्न में परिवर्तन आया है, जिसके कारण अनेक प्रवासी पक्षियों को अपनी वापसी यात्रा स्थगित करनी पड़ रही है। यही कारण है कि वे जोधपुर झाल, केवलादेव तथा सूरसरोवर जैसे महत्वपूर्ण स्टॉपओवर वेटलैंड्स पर अपेक्षाकृत अधिक समय तक रुके हुए हैं।

 

 

“प्रवासी पक्षियों के इस असामान्य ठहराव को देखते हुए जोधपुर झाल वेटलैंड पर उनके लिए आवश्यक आवास, जल एवं भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रभावों को समझने और पक्षी संरक्षण को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर निगरानी की जा रही है।”

— लक्ष्मी नागप्पन

मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ)

उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, मथुरा