नई दिल्ली। देश में बदलते जनसंख्या स्वरूप और अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर केंद्र सरकार ने अब प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर बड़ी पहल शुरू कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने मंगलवार को ‘डेमोग्राफी चेंज’ की जांच और अध्ययन के लिए हाई-लेवल कमेटी के गठन का एलान किया। इस समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर करेंगे।

सरकार का कहना है कि अवैध घुसपैठ और “असामान्य जनसंख्या परिवर्तन” भविष्य में राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक संतुलन और संसाधनों के वितरण के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। यही वजह है कि अब इस विषय को केवल सीमा सुरक्षा तक सीमित न रखकर नीति निर्माण के केंद्र में लाया जा रहा है।
समिति धार्मिक और सामाजिक समुदायों के स्तर पर हो रहे जनसंख्या बदलावों का अध्ययन करेगी। इसके साथ ही सीमावर्ती राज्यों, महानगरों और तेजी से बदलते जिलों के आंकड़ों की भी समीक्षा होगी। समिति में जनगणना आयुक्त, पूर्व आईएएस अधिकारी, पूर्व आईपीएस अधिकारी और अर्थशास्त्री भी शामिल किए गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम आने वाले परिसीमन, संसदीय सीटों के पुनर्गठन और संसाधनों की नई नीति से भी जुड़ सकता है। हाल के वर्षों में केंद्र सरकार लगातार “जनसांख्यिकीय असंतुलन” को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाती रही है। ऐसे में इस कमेटी की रिपोर्ट भविष्य की राजनीति और प्रशासनिक फैसलों की दिशा तय कर सकती है।

गृह मंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि “अननेचुरल डेमोग्राफिक चेंज” किसी भी राष्ट्र के वर्तमान और भविष्य के लिए गंभीर चुनौती है और इससे निपटने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा 15 अगस्त 2025 को घोषित समिति अब औपचारिक रूप से गठित कर दी गई है।






