अड़ींग पंचायत: 39 करोड़ की ग्रांट की जांच तेज, 3.5 करोड़ के बारातघर की फाइल गायब होने से बढ़ा संदेह

दिलीप यादव वरिष्ठ पत्रकार मथुरा

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मथुरा, 17मई 2026।

जांच टीम करोड़ों की पत्रावली साथ ले गई, लोकायुक्त परिवादी ने भी सौंपे घपलों के दस्तावेज

Mathura के ग्राम पंचायत अड़ींग में 39 करोड़ रुपये की परफॉर्मेंस ग्रांट में कथित अनियमितताओं की जांच अब तेज हो गई है। जिलाधिकारी स्तर पर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति शनिवार को पंचायत कार्यालय पहुंची और करोड़ों रुपये के विकास कार्यों से जुड़ी पत्रावलियां अपने साथ ले गई। हालांकि 3.5 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन बारातघर की फाइल जांच टीम को उपलब्ध नहीं कराई गई, जिससे नए सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच के बीच 50-60 लाख निकालने की तैयारी का आरोप

ग्राम पंचायत में चर्चा है कि बारातघर निर्माण कार्य की माप पुस्तिका (एमबी) तैयार कर करीब 50 से 60 लाख रुपये की धनराशि निकालने की तैयारी की जा रही है। इसी कारण संबंधित पत्रावली जांच समिति को नहीं दी गई। समिति के सदस्यों ने इस मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों और कमिश्नर स्तर तक किए जाने की बात कही है।

डीएम और कमिश्नर स्तर पर अलग-अलग जांच

39 करोड़ की परफॉर्मेंस ग्रांट मामले में मंडलायुक्त आगरा और जिलाधिकारी मथुरा दोनों स्तरों पर अलग-अलग तीन सदस्यीय जांच समितियां गठित हैं। दोनों समितियां अपने-अपने स्तर से जांच कर रही हैं।

जिलाधिकारी द्वारा गठित समिति को 15 मई तक जांच पूरी करनी थी, लेकिन शनिवार को टीम गांव पहुंची। पंचायत कार्यालय में एसडीएम न्यायिक छाता अखिलेश कुमार ने विकास कार्यों की पत्रावलियों का परीक्षण किया। जांच दल में बीडीओ छाता और लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता भी शामिल रहे।

टीम ने कई आपत्तिजनक पत्रावलियां पंचायत सचिव से लेकर अपने कब्जे में ले लीं। जांच दल के पहुंचने पर पूर्व सचिव रामवीर, थान सिंह, स्थानांतरित सचिव यतिन शर्मा तथा आगत सचिव मनोज भंडारी भी मौके पर मौजूद रहे।

हर विकास कार्य का होगा स्थलीय निरीक्षण

एसडीएम न्यायिक अखिलेश कुमार ने बताया कि जांच केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी। आगामी दिनों में हर विकास कार्य का स्थलीय निरीक्षण कराया जाएगा। इसके लिए विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ कर्मचारियों को भी जांच में लगाया जा रहा है।

लोकायुक्त परिवादी ने भी पेश किए घपलों के दस्तावेज

उधर लोकायुक्त के निर्देश पर मंडलायुक्त आगरा द्वारा गठित समिति के समक्ष परिवादी अजीत सैनी ने शुक्रवार को कथित घोटालों और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेज और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की।

पंचायत भंग, फिर भी धन निकासी पर सवाल

मामले का सबसे बड़ा विवाद यह है कि ग्राम पंचायत का बोर्ड 17 फरवरी से भंग बताया जा रहा है। पंचायत के 15 में से 12 सदस्य त्यागपत्र दे चुके हैं। इसके बावजूद निर्माण कार्यों के नाम पर भुगतान प्रक्रिया जारी रहने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि पंचायत में न तो कोई प्रशासक नियुक्त है और न संचालन समिति कार्यरत है, फिर भी धन निकासी की तैयारी क्यों की जा रही है।

‘मेरी पंचायत’ एप पर भी गड़बड़ी का आरोप

शिकायतकर्ताओं ने डीपीआरओ पर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पंचवर्षीय कार्यकाल के दौरान “मेरी पंचायत” सरकारी एप पर 15 में से 14 सदस्यों के मोबाइल नंबर की जगह रोजगार सेवक का नंबर दर्ज रहा। शिकायत के बावजूद इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।

अब दोनों जांच समितियों की कार्रवाई और स्थलीय निरीक्षण पर सबकी निगाहें टिकी हैं।