आचार्य रामविलास चतुर्वेदी, ज्योतिषाचार्य
दो दिवसीय आयोजन में 12 बटुकों का वेदारंभ, संतों और विद्वानों ने संस्कारों के महत्व पर दिया जोर
वृन्दावन।
अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर वृन्दावन स्थित केशवधाम द्वारा संचालित केशव वेद विद्यालय में प्राचीन वैदिक परम्परा के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से दो दिवसीय दशम सामूहिक यज्ञोपवीत (उपनयन) संस्कार का आयोजन वैदिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान 12 बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार कर उन्हें वेदारंभ कराया गया।
कार्यक्रम में बटुकों को ब्रह्मदण्ड धारण कराते हुए हवन, गायत्री दीक्षा एवं संध्यावंदन का विधिवत प्रशिक्षण दिया गया। विद्वानों ने बताया कि वेद अध्ययन प्रारंभ करने से पूर्व यज्ञोपवीत संस्कार अत्यंत आवश्यक होता है, जिससे विद्यार्थी आध्यात्मिक अनुशासन और ज्ञान के मार्ग पर अग्रसर होते हैं।
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अवसर पर बीतराग संत श्री गोविन्दानंद तीर्थ जी महाराज ने कहा कि यज्ञोपवीत संस्कार प्रत्येक बालक के लिए आवश्यक है। उन्होंने बताया कि ब्राह्मण का यज्ञोपवीत आठ वर्ष, क्षत्रिय का 11 वर्ष और वैश्य का 12 वर्ष की आयु में होना चाहिए। उन्होंने यज्ञोपवीत और शिखा को व्यक्ति को ऊर्जावान बनाने वाला बताते हुए इसके आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता आचार्य डॉ. रामविलास चतुर्वेदी ने कहा कि वेद साक्षात भगवान हैं और बिना यज्ञोपवीत संस्कार के वेद अध्ययन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने संध्यावंदन और गायत्री साधना को ब्रह्मतेज और आध्यात्मिक उन्नति का आधार बताया।
संत श्री सत्यमित्रानंद जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि व्यक्ति का चरित्र ही उसकी पहचान बनाता है। यज्ञोपवीत धारण कर संस्कारों के अनुरूप जीवन जीने से ही जीवन सफल होता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रमुख उद्योगपति लक्ष्मण सराफ ने की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में यह संस्कार सभी समाजों के लिए आवश्यक है। केशवधाम के निदेशक ललित कुमार ने वैदिक सनातन संस्कृति के संरक्षण के लिए यज्ञोपवीत धारण करने पर बल दिया।
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए ओमप्रकाश बंसल ने बताया कि केशवधाम वेद विद्यालय में विगत 10 वर्षों से यज्ञोपवीत संस्कार नियमित रूप से आयोजित किया जा रहा है।
कार्यक्रम का संचालन आचार्य ब्रजेन्द्र नागर ने किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और ऋषि परम्परा को सुरक्षित रखने के लिए बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार देना आवश्यक है।
इस अवसर पर विश्वनाथ गुप्ता, गंगाधर अरोड़ा, प्रधानाचार्य आचार्य रवीन्द्र शर्मा, आचार्य सुधाकर द्विवेदी, संदीप चतुर्वेदी सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।







