मथुरा, दघेंटा।
लगातार 16 दिन बीत चुके हैं। गांव की सड़कों पर विरोध की आवाजें गूंज रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों के कानों तक जैसे कुछ पहुंच ही नहीं रहा। शराब ठेका हटाने की मांग को लेकर दघेंटा के ग्रामीणों का धरना गुरुवार को भी जारी रहा, जो अब एक गंभीर और सनसनीखेज जनआंदोलन का रूप ले चुका है।
आज प्रदर्शन ने नया रूप लिया। ग्रामीणों ने मुंह पर काली पट्टी बांधकर यह संदेश दिया कि उनकी आवाज को दबाया जा रहा है, वहीं थालियां बजाकर उन्होंने उस आक्रोश को जाहिर किया, जो लंबे समय से भीतर सुलग रहा है। यह सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि व्यवस्था के प्रति गहराते अविश्वास की गूंज है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की आबादी के बीच स्थित शराब का ठेका सामाजिक ताने-बाने को तोड़ रहा है। महिलाओं की सुरक्षा, बच्चों का भविष्य और युवाओं की दिशा—सब पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। इसके बावजूद प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
धरने के दौरान आबकारी विभाग पर भी गंभीर आरोप लगे। ग्रामीणों ने कहा कि विभाग की कथित मिलीभगत से ठेकेदार घटिया और संदिग्ध शराब की बिक्री कर रहे हैं। उन्होंने अन्य स्थानों पर जहरीली शराब से हुई मौतों का हवाला देते हुए चेताया कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच बाहरी जनपद के अधिकारियों से कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आए और जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो सके। साथ ही, शराब के ठेके को तुरंत आबादी क्षेत्र से हटाने की मांग को दोहराया गया।
धरने में अवधेश रावत, मुकेश सिंह रावत, चंद्रपाल सरपंच, संजय मास्टर, कुंज भोज, आंसू चौधरी, ओमवीर, सत्येंद्र, देवेंद्र, गिर्राज, अतर सिंह, जबर सिंह, हरिमोहन, प्रताप सिंह, विजय सिंह, गुड्डू, रनबीर, जगदीश, घनश्याम, मुख्तयार सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा—और तब हालात संभालना प्रशासन के लिए आसान नहीं होगा।








