54 साल बाद खुले बांके बिहारी मंदिर के खजाने में मिले दो सांप

मनोज चौधरी  मथुरा/वृंदावन।

विश्वप्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर का रहस्यमयी खजाना आखिरकार 54 साल बाद खोला गया। वर्ष 1971 के बाद पहली बार खुले इस तोषखाने को लेकर भक्तों और स्थानीय लोगों में भारी उत्सुकता रही। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित हाई पावर कमेटी की निगरानी में शनिवार दोपहर यह ऐतिहासिक प्रक्रिया शुरू हुई। मंदिर परिसर को सुरक्षा बलों से घेर लिया गया था और पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराई जा रही थी।

बांके बिहारी जी मंदिर

कार्रवाई से पहले विशेष पूजा-अर्चना की गई। स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस खजाने की रक्षा स्वयं शेषनाग करते हैं — और जैसे ही तहखाना खोला गया, वहां से दो छोटे सांप निकलने पर कुछ देर के लिए अफरातफरी मच गई।

करीब चार घंटे चली इस प्रक्रिया के दौरान तहखाने से तीन बक्से मिले

— जिनमें से दो के कुंदे टूटे पाए गए। हाई पावर कमेटी सदस्य दिनेश गोस्वामी ने बताया कि एक बक्से में चांदी का छत्र और कुछ चांदी के बर्तन मिले हैं, जबकि सबसे नीचे का तहखाना खाली मिला। दो बक्से अभी और खोलने बाकी हैं।

हालांकि, खजाने की यह कार्रवाई विवादों में भी घिर गई।

गोस्वामी समाज ने कमेटी की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अध्यक्ष अशोक कुमार की अनुपस्थिति में बिना सूचना यह कार्रवाई शुरू की गई और गोस्वामी परिवार के किसी सदस्य को शामिल नहीं किया गया। इसको लेकर मंदिर परिसर में नारेबाजी और नोकझोंक भी हुई।

कमेटी सदस्य शैलेंद्र गोस्वामी ने कहा —

> “मैं गोस्वामी परिवार का हिस्सा हूं और इस प्रक्रिया का लगातार विरोध कर रहा था। हमारे पूर्वजों के समय से यह खजाना बंद है, लेकिन समिति ने मंदिर की व्यवस्था सुधारने की बजाय सिर्फ खजाने पर ध्यान दिया है।”

इसी बीच डीएम, एसएसपी और कमेटी अध्यक्ष की अनुपस्थिति पर भी सवाल उठे। मौके पर सिटी मजिस्ट्रेट राकेश कुमार, एसपी सिटी राजीव कुमार, एडीएम पंकज वर्मा, सीओ संदीप सिंह और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

सीओ सदर संदीप सिंह ने बताया कि टीम बेसमेंट तक पहुंच चुकी है और निरीक्षण जारी है। आगे की जानकारी हाई पावर कमेटी द्वारा दी जाएगी।

रजत गोस्वामी का कहना है कि दो महीने से अधिक बीत जाने के बाद भी कमेटी ने श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर कोई कदम नहीं उठाया है — “कमेटी की नजर सिर्फ खजाने पर है।”

54 साल बाद खुले बांके बिहारी मंदिर के इस रहस्यमयी खजाने ने न केवल भक्तों में उत्साह जगाया है बल्कि पारदर्शिता और अधिकारों को लेकर प्रशासन के सामने नई

चुनौती भी खड़ी कर दी है।