इशारों ही इशारों में योगी कर गए दुनिया को सचेत, छोड़ गए बड़ा सवाल

 

मनोज चौधरी: 

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बात होगी, हलक से बाहर निकलेगी तो फिर दूर तलक जाएगी । उत्तर प्रदेश सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ भगवान श्रीकृष्ण के 5252 वें प्राकट्य दिवस पर योगिराज की जन्मस्थली से इशारों ही इशारों में दुनिया को सचेत कर गए। कलयुग के पांच हजार से भी अधिक वर्ष बीत जाने के बाद भी मथुरा को द्वापरयुग में वापस ले जाने की कह कर दुनिया को हैरान तो कर ही गए और साथ यहां की आध्यात्मिक विरासत के महत्व को भी समझा गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब भी दुनिया को किसी संकट से उबरना होगा तब तब स्थाई शांति का मार्ग भारत की आध्यात्मिक विरासत से प्रशस्त होगा। साथ ही उन्होंने इसके संरक्षण की बात कही और बताया कि एक दशक पहले  काशी विश्वनाथ में 50 लोग एक साथ दर्शन नहीं कर सकते थे। राम मंदिर के निर्माण से पहले और बाद की तस्वीर को मुख्यमंत्री ने मंच से भी उभरा और कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान को धर्मयुद्ध में बदलने वाले भगवान श्रीकृष्ण की लीला भूमि को द्वापरयुग में ले जाने का बड़ी गंभीर बात भी इशारों ही इशारों में कह गए।

मथुरा की हर एक उस धुंधली तस्वीर को भी साफ करते हुए मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सज्जनों की रक्षा होगी और दुष्टों का संहार करने में भी वह कोई भी संकोच नहीं करेंगे। 

आध्यात्मिक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए जनता से आगे आने का आग्रह करते हुए कहा कि जब जनता के पीछे सरकार खड़ी होगी तो फिर उत्तर प्रदेश में विकास ही विकास। दुनिया में आध्यात्मिक विरासत का केंद्र भी उत्तर प्रदेश होगा।

मगर, योगी छोड़ गए एक सवाल

 कैसा था द्वापरयुग का मथुरा। श्रीकृष्ण ने यहां से प्रेम का संदेश दुनिया को दिया और राक्षसों का वध भी किया। योगी भी तो यही बात कह गए।

आध्यात्मिक विरासत पर तो हुए बार बार हमले 

मथुरा की आध्यात्मिक विरासत पर तो पहला हमला 1017 में अफ़ग़ानिस्तान से आए क्रूर आक्रांता, लुटेरे, बहशी दरिंदे महमूद गजनवी ने किया था। इसके बाद में तो फिरोजशाह तुगलक, सिकन्दर लोदी, औरंगजेब, अहमदशाह अब्दाली ने भी आध्यात्मिक सांस्कृतिक विरासत को कुचलने का कार्य किया था। मुख्यमंत्री इसलिए ही तो उस समय में पूर्वजों के आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने का जिक्र किया। इतिहास भी तो यही कहता है कि मथुरा को विश्व मानव जाति के लिए निष्काम कर्म की प्रेरणा देने वाले और आध्यात्मिक सांस्कृतिक विरासत के जनक भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि का वास्तविक नक्शा  भी तो मुगल काल में ही बदला गया। मुख्यमंत्री ने राममंदिर निर्माण आंदोलन को लेकर जुमलों की सरकार बताकर तंज कसने वालो पर चुटकी लेते हुए कहा कि जिसे लोग असंभव बताते थे, उसे भी संभव कर दिखाया।  हम ला रहे तीस हजार करोड़ की योजना। कहा कि यमुना की अविरलता निर्मलता भी बरकार रहेगी। 

कहीं ये बात तो नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने तय किया है , मथुरा, गोवर्धन, बरसाना, राधाकुंड समेत अन्य धार्मिक स्थलों की पौराणिकता को बहाल की जाएगी। तो फिर श्रीकृष्ण जन्मभूमि भी इसमें क्या शामिल है।

उसी मानचित्र को दुरुस्त करने की तो ये कर रहे हैं वकालत

राजा बज्रनाभ ने अपने पूर्वज कुल देवता भगवान श्री कृष्ण का 13.37 एकड़ में जिस भव्य मंदिर का निर्माण कराया था। मुगलकाल में बदले गए श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के मानचित्र को दुरुस्त करने की मांग को लेकर महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट न्यायालय से लेकर जनता के बीच जाकर लड़ाई लड़ रहे हैं। वह कहते हैं कि उन्होंने प्रण लिया है कि वह मूल गर्भ गृह पर फिर से मंदिर बनाने तक अपना संघर्ष जारी रखेंगे।