मथुरा 4 अगस्त 2025: डीएम साहब! बचा लो गांव। पिछले दिनों हुई बरसात ने सिंचाई विभाग के बरसाती नालों की सच्चाई उजागर कर दी।
शहरी आबादी से लेकर ग्रामीण जीवन तक जलभराव की चपेट में आ गया। पोखर तालब भी उफान गए और पानी लोगों के घरों में प्रवेश कर गया। आम रास्ते लबालब हो गए।
नालियों का पानी उल्टा लौटने लग गया। महानगर के वार्ड 15 में शामिल गांव मुकुंदपुर में दर्जन भर परिवार पलायन के मुहाने पर खड़े हैं। महानगर अध्यक्ष विनोद
अग्रवाल से लेकर पार्षद को ग्रामीणों ने संभावित खतरे से अवगत करा दिया है। नगर आयुक्त इससे अनजान भी नहीं हैं। कोई भी अप्रत्याशित घटना घटित होने पर जनप्रतिनिधि और नगर निगम के अफसर यह कहकर बच जाएंगे कि पानी की निकासी को ट्रैक्टर भेजा था, जो पिछले कई महीनों से पोखर में भरे पानी निकासी के कार्य में लगा है, मगर सच्चाई यह है कि कभी पोखर खाली ही नहीं हुई। 
पर्यटन के शिखर पर पहुंचाने की दंभ भर रहे जनप्रतिनिधि से लेकर गांव के प्रधान तक वर्षों से वर्षाकाल में जल मग्न होने वाले गांवों की मुख्य समस्या बरसाती नालों की सफाई न कराना है। कई नाले तो सिंचाई विभाग के नक्शा में प्रदर्शित हैं, पर धरातल पर उनका कोई भी अता पता तक नहीं है।


कभी ग्रामपंचायत रहे गांव मुकुंदपुर को स्वच्छता का अवॉर्ड मिला था, पर नगर निगम का हिस्सा बनते ही नरकपुर गांव बन गया। गांव की दोनों पोखर उफान भर रही हैं। दो दर्जन से अधिक परिवार पलायन की देहरी पर बैठे हैं। गांव के दो रास्ते पानी में डूब गए है। महानगर के वार्ड 15 में शामिल गांव मुकुंदपुर की जनता यह दंश कई साल से झेल रहा है। हम यह तो नहीं जानते है कि गांव की साफ सफाई और जलभराव समस्या से कब जनता को छुटकारा मिलेगा, पर ये खतरा अवश्य कई परिवारों के सिर पर मंडरा रहा है कि वे कहीं किसी अनहोनी घटना के शिकार न बन जाए। तालाब और रास्तों के लबालब भरे होने से अब निकलने में यह डर लगता है कि किसी दिन कोई फिसल कर तालाब पोखर में न फिसल जाए। मोहन लाला प्रजापति के घर के सामने लकड़ी के पट्टा ठीक पोखर के किनारे पर रखे है, बच्चे के अलावा बुजुर्ग भी इन पट्टों के ऊपर से निकलते है। इसी तरह दूसरे तलब के किनारे अजित सिंह के घर के पास का हाल है।
डीएम साहब, महानगर अध्यक्ष, पार्षद सुनते नहीं। सांसद और विधायक को यहां की जनता के दर्द से कोई सरोकार नहीं लगता है। नगर निगम के अफसर की ओर से कोई गिरे मरे, उनकी सेहत पर कोई कुप्रभाव नहीं पड़ता। अब तो हर शख्स हताश, मायूस और दुःखी है, और बड़ी उम्मीदों से आपकी तरफ से मिलने वाली मदद के आने की रहा टकटकी लगाकर देख रहा है।
पत्रकार
मनोज चौधरी








