मनोज चौधरी
सूर्य की बरसती आग पर 16 जून की सुबह खूब पानी बरसा। वायुमंडल में आंधी तूफान से छाई धुंध बूंदों के साथ वसुंधरा पर आ गई और प्रकृति नहा गई। गर्म हवाओं में ठंडक घुल गई। बदन झुलसाऊ गर्मी से राहत मिल गई।
बृज की धरा करीब एक सप्ताह से तवे के माफिक धधक रही थी। तापमान भले ही तापमापी पार 45- 46 डिग्री सेल्सियस मापा गया हो, लेकिन 49 डिग्री सेल्सियस तक ये महसूस किया गया। जलाशयों का पानी तक उबलने लगा था, खासकर उथले और छोटे तालाबों में जलचर जीव भी व्याकुल हो गए। पेड़ों के नीचे भी जनमानस और पक्षियों को राहत नहीं मिल रही थी। जंगली जानवर भी छांव और पानी की तलाश में हांफने लगे थे। विद्युत आपूर्ति लगभग पटरी से उतर चुकी थी। हर तरफ भीषण गर्मी से हाहाकार मचाने लगा था।
वर्षा से पहाड़ों का मलबा बहकर नदियों में गया, जबकि पुणे में एक नदी का पुल भी तेज बहाव के कारण टूट गया।








