
-सौंख-कुम्हेर रोड एसओजी और थाना मगोर्रा पुलिस की हुई मुठभेड़
– पुलिस महानिरीक्षक ने गिरफ्तारी पर घोषित किया था 50 हजार का इनाम
-दोनों राज्यों में आरोपी के खिलाफ विभिन्न थानों में दर्ज हैं 28 मुकदमा
मथुराः उत्तर प्रदेश और राजस्थान प्रांत में एक बाद एक आपराधिक वारदात कर पुलिस की रातों की नींद उड़ा रहा पचास हजार रुपये का इनामी डकैत हरी सिंह मीणा से मंगलवार रात दोनों राज्यों के बार्डर पर सौंख-कुम्हेर रोड पर एसओजी और थाना मगोर्रा पुलिस का आमाना-सामना हो गया। दोनों ओर से पांच राउंड गोलियां चली। गोली लगने से कुख्यात हरी सिंह मीणा घायल हो गया। मीणा के खिलाफ उत्तर प्रदेश और राजस्थान के विभिन्न थानों में 28 मुकदमा दर्ज है।
राजस्थान प्रांत के दौसा जिले के थाना मानपुर के गांव पीलौडी का रहने वाला हरीसिंह मीणा पुत्र हजारी लाल मीणा वर्ष 2007 से ही लगातार आपराधिक घटनाएं कर रहा था। वर्ष 2022 से उसने राजस्थान के साथ-साथ मथुरा में आपराधिक वारदात करना शुरू कर दिया था। पुलिस महानिरीक्षक ने हरी सिंह मीणा की गिरफ्तारी पर पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया। एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने एसओजी प्रभारी राकेश यादव को कुख्यात की गिरफ्तार करने को लगाया। रात को एसओजी को मीणा की सटीक लोकेशन सौंख-कुम्हेर मार्ग पर मिली। वह राजस्थान से उत्तर प्रदेश सीमा में वारदात करने की फिराक में आ रहा था। थाना मगोर्रा पुलिस के साथ मिलकर एसओजी ने हरी सिंह मीणा को बार्डर पर ही घेर लिया। पुलिस चक्रव्यहू में फंसा देखकर मीणा ने फायरिंग आरंभ कर दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में गोली लगने से हरी सिंह मीणा घायल हो गया। एसपी ग्रामीण त्रिगुण बिसेन ने बताया, हरी सिंह के खिलाफ मथुरा के अलावा राजस्थान प्रांत के विभिन्न जिलों में चोरी, लूट, डकैती और लोगों के ऊपर जानलेवा हमले के 28 मुकदमा दर्ज हैं। मुठभेड़ में उसके दोनों पैरों में गोली लगी है। मौके सेएक तमंचा, दो खोखा, चार जिंदा 315 बोर कारतूस और चुराई गई एक मोटरसाइकिल बरामद हुई है।
-ये था वारदात का तरीकाः कुख्यात हरी सिंह मीणा चार पहिया वाहन से आकर घरों के बाहर खड़े ट्रैक्टर की पहले रेकी करता था। मौका लगते ही अपने वाहन
पांच सौ मीटर की दूर खड़ा करके ट्रैक्टर को सौ मीटर तक धक्का मारकर ले जाता था। उसके बाद स्टार्ट कर कच्चे रास्तों से राजस्थान के कस्बा कामा से होते हुए पहाड़ी पर ले जाकर सुरक्षित स्थान पर खड़ा कर देता था। बाद में ट्रेक्टर को इंजन और चेसिस नंबर बदल कर बाहर राज्यों में किसानों को बेच देता था। आरोपी के गैंग में अन्य लोग भी शामिल थे।








