इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सोमवार को ठाकुर बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर (गलियारा) बनाए जाने की राज्य सरकार की योजना को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है कि मंदिर के बैंक खाते में जमा 262.50 करोड़ रुपये की धनराशि को नहीं छुआ जाएगा। कोर्ट ने कहा कि सरकार को कॉरिडोर के निर्माण के दौरान श्रद्धलुओं को दर्शन प्रभावित नहीं होने चाहिए और सभी सुविधाओं का ख्याल रखा जाए। यह आदेश आज मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने अनंत कुमार शर्मा व अन्य की जनहित याचिका पर दिया है। इस मामले में कोर्ट ने आठ नवंबर को सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि मंदिर प्रबंधन में कोई भी दखलन्दाजी न दी जाए। इस मामले में कोर्ट ने जिला प्रशासन को आदेशित किया है कि आदेश का पालन सुनिश्चित कर 31जनवरी 2024 को अपनी रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए।
वर्ष 2022 में अनन्त शर्मा, महंत मधुमंगल शुक्ला आदि ने वृंदावन में ठाकुर बांके बिहारी जी मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के मद्देनजर गलियारा निर्माण को लेकर कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। पांच एकड़ भूमि पर गलियारा बनाया जाना है। अब योगी सरकार को यह गलियारा बनाया जाना है।
प्रधानमंत्री कर सकते हैं बड़ा ऐलान
बांके बिहारी जी के गलियारा बनाए जाने का निर्णय उस समय आया है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 नवम्बर को मथुरा में चल रहे ब्रज रज उत्सव में शामिल होने के लिए आ रहे हैं। प्रधानमंत्री भरतपुर जिले में हाल ही चुनावी सभा मे ब्रज के विकास की बात कर चुके हैं। मथुरा वृन्दावन दौरे के दौरान प्रधानमंत्री बांके बिहारी जी के दर्शन के लिए भी जाएंगे । उनका कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बांके बिहारी मंदिर के कॉरिडोर के निर्माण के लिए कोई बड़ी घोषणा भी कर सकते हैं। क्योंकि काशी और अयोध्या के बाद अब मथुरा की ही बारी है।









