
आदित्य मंगल न्यूज, मथुरा
वर्षा से गेहूं की फसल में हुए नुकसान के आंकलन कार्य में जिम्मेदार अधिकारी तेजी नहीं दिखा रहे है। छाता और गोवर्धन तहसील क्षेत्र में अधिकतम 45 प्रतिशत तक नुकसान फसल में हुआ है। क्षतिपूर्ति को किसान बीमा कंपनी और राजस्व विभाग की टीम के आने का इंतजार कर रहे है। उनको कॉल कर अपनी व्यथा भी बता रहे है। पर सुनवाई नहीं हो पा रही है।
पश्चिमी विक्षोभ के कारण मंगलवार सुबह मौसम खराब हो गया। इससे पहले भी वर्षा हुई। बेमौसम वर्षा से 1.95 लाख हेक्टेयर भूमि में बोई गई गेहूं की फसल को सर्वाधिक नुकसान हुआ है। खड़ी फसल जमीन पर गिर गई है। बाली और नरई दोनों ही भीग गई है। खलियान में कटे पड़े गेहूं के बंडल को उठा-उठा कर किसान एक जगह एकत्र कर रहे है। भीगने से दाने की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। चमक फीकी हो गई है। नरई गल कर काली पड़ गई है। इससे भूसा भी काला पड़ जाएगा। जो जल्दी खराब हो जाएगा। भविष्य में किसानों के सामने पशुओं के चारे का संकट पैदा हो सकता है। जो फसल गिर गई है। उसकी कटाई करना मुश्किल हो गया है। हारर्वेस्टर से भी फेल है। मजदूर ऐसी फसल को काटने के लिए अधिक मजदूरी मांग रहे है। अन्नदाता संकट में हैं। जिखनगांव के मौजा भूतपुरा के प्रगतिशील किसान नवाब सिंह ने बताया, उनके खेत में कटी फसल का आंकलन करने को अभी तक कोई नहीं आया है। पिछले 10-12 दिन से वह लगातार अधिकारियों को कॉल कर नुकसान के आंकलन की मांग कर रहे है। अधिकांश किसान परेशान है।
-सर्वाधिक नुकसान छाता और गोवर्धन तहसील क्षेत्र में हुआ है। अभी क्राॅप कंटिंग का कार्य चल रहा है। जिन किसानों की फसल गिर गई है। उसकी अभी कटाई नहीं हुई है। जल्द ही आंकलन का कार्य कर लिया जाएगा। किसानों का जो भी नुकसान हुआ है, उसकी क्षतिपूर्ति बीमा कंपनी करेगी।-विजय सिंह, जिला प्रबंधक एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी








