कारावास में हथकरघा में दरी-चादर, ठाकुरजी की पोशाक और गोबर से बना रहे उत्पाद

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जिला कारागार में 200 बंदी ऐसे हैं, जो किए गए अपराध का प्रायश्चित तो कर ही रहे हैं। साथ ही जेल में ठाकुरजी की पोशाक, हथकरघा से दरी और चादर, गाय के गोबर से दीपक, स्वास्तिक, एलईडी बल्ब आदि बना रहे हैं। इस कार्य के बदले उनको मिलने वाली धनराशि को वह अपने स्वजन को भेज रहे हैं। अपने भाई एवं बच्चों की पढ़ाई, परिवार खर्च, मां के इलाज और मुकदमा की पैरवी के लिए यह राशि ये स्वजन

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को भेज रहे हैं। एक बंदी ने 90 और दूसरे ने 80 हजार रुपये इस माह स्वजन को भेजे हैं। इससे स्वजन की आर्थिक तंगी दूर हो रही है

जनवरी, 2021 को न्यायालय ने धीरज को उसके द्वारा किए गए अपराध की आजीवन कारावास सुनाया तो वह डिप्रेशन में आ गया। परिवार को भी झटका लगा। बेटे के कारावास को सुनकर मां बीमार हो गई। तब धीरज को पश्चाताप हुआ, लेकिन प्रायश्चित करने का अवसर भी उसके पास नहीं था। तब जेल अधीक्षक ब्रजेश कुमार और उनकी टीम के प्रयास से धीरज को प्रायश्चित करने का अवसर मिला तो उसने हथकरघा पर अपने हाथ चलाने शुरू कर दिए। दिनभर के अथक परिश्रम से उसने एक लाख रुपये से अधिक का मेहनताना कमाया और घर भेज दिया। जेल अधीक्षक ने बताया, यह धनराशि भी उसने अपनी मां के उपचार के लिए भेजी। प्रायश्चित के संग अपनों का दर्द कम करने की सूची में कोई धीरज का नाम अकेला नहीं है। ऐसे बंदियों की संख्या दो सौ है। जघन्य अपराध में विचाराधीन बंदी संतोष भी 90 हजार रुपये अर्जित किए। संतोष ही अपने घर में अकेले कमाने वाले थे। अपने भाई की पढ़ाई और मुकदमा की पैरवी के लिए वह धनराशि जेल में काम करके भेज रहे हैं। हत्या मुकदमा जितेंद्र सैनी ने भी 70 हजार रुपये जेल में काम करके अपने परिवार को घरेलू खर्च और मकान के किराए का भुगतान करने के लिए भेजे हैं।

जेल अधीक्षक कहते हैं कि जेल में कौशल विकास मिशन के अंतर्गत हथकरघा पर दरी-चादर, ठाकुरजी की पोशाक, एलइडी बल्व, गाय के गोबर से उत्पाद और मिट्टी के कुल्हड़ बना रहे है। इसके बदले उनको पारिश्रमिक दिया जा रहा है। 25 से 50 हजार रुपये तक अपने घर भेजने वाले बंदियों की संख्या सौ से अधिक है।

-अब सांझी कला में होंगे निपुण : अब जेल में सांझी कला का प्रशिक्षण आरंभ किया गया है। एक महीने का यह प्रशिक्षण खजानी वेलफेयर सोसाइटी देगी। जेल अधीक्षक ने बताया, 20 महिला बंदी और 15 पुरुष बंदियों को पहले सांझी कला आर्टस का बनाना सिखाया जाएगा। इसके बाद प्रशिक्षित बंदियों के माध्यम से दूसरे बंदियों को प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।

-चुराते थे मोटरसाइकिल हो गए मिस्त्री : मोटरसाइकिल चुराकर धनराशि जुटा रहे चोरों को भी जेल में काम करना सिखाया गया। वह भी मोटरसाइकिल बनाने का का। जो कभी मोटरसाइकिल चुराते थे, अब वह मोटरसाइकिल के मिस्त्री बन गए है। जेल अधीक्षक ने बतााय, मोटरसाइकिल चोरी के मामले में पकड़े गए बंदियों को जेल के अंदर ही मोटरसाइकिल ठीक करने का काम सिखाया गया। ताकि वह जेल से रिहा होने के बाद मोटरसाइकिल बनाकर अपना रोजी-रोटी कमा सके।