मथुरा : सिंचाई विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की अनदेखी के कारण यमुना में एक महीने तक दूषित पानी गिरता रहा। इससे यमुना में गंदगी समा गई और पानी से दुर्गंध आने लगी है। मंगलवार को हाई कोर्ट और एनजीटी में जनहित याचिका दायर करने वाले याची गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने मंगलवार को इसकी शिकायत डीएम पुलकित खरे से की। उनका कहना है, यमुना जल जो एक महीने में दूषित हुआ है, उसके लिए सिंचाई विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हे। राल ड्रेन के पानी का दबाव मसानी नाले पर बढ़ गया था। नाले में जमी सिल्ट, औद्योगिक इकाइयों का केमिकल युक्त पानी यमुना जल में मिल गया। उन्होंने डीएम से इसके लिए दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की मांग की है।








