सोशल मीडिया बना आतंक का नया हथियार, NIA ने उजागर किया डिजिटल कट्टरपंथ का खतरनाक नेटवर्क

 

इंस्टाग्राम से संपर्क, टेलीग्राम पर गोपनीय बातचीत और क्रिप्टो से फंडिंग; जांच एजेंसी ने बदली आतंकी रणनीति का किया खुलासा

 

नई दिल्ली। आतंकवाद का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब बंदूक और बारूद के साथ-साथ सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप और डिजिटल करेंसी भी आतंकियों के प्रमुख हथियार बनते जा रहे हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की हालिया जांच में ऐसे डिजिटल नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें युवाओं तक पहुंच बनाने, उन्हें कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करने और आर्थिक सहायता जुटाने के लिए आधुनिक तकनीक का सुनियोजित इस्तेमाल किया जा रहा था।

जांच में सामने आया कि संदिग्ध नेटवर्क सबसे पहले इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों से संपर्क स्थापित करता था। विश्वास बनने के बाद बातचीत को टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर दिया जाता था, जहां गोपनीय संवाद, प्रचार सामग्री साझा करने और नेटवर्क को विस्तार देने का काम होता था। आर्थिक लेन-देन के लिए क्रिप्टोकरेंसी का उपयोग किया जाता था, जिससे धन के स्रोत और उसके उपयोग का पता लगाना कठिन हो जाता था।

एनआईए के अनुसार, डिजिटल माध्यमों के जरिए संचालित यह नेटवर्क पारंपरिक आतंकी गतिविधियों से अलग और अधिक चुनौतीपूर्ण है। इसमें सीमा पार बैठे हैंडलर इंटरनेट के माध्यम से भारत में बैठे लोगों से सीधे संपर्क स्थापित कर सकते हैं। जांच एजेंसी डिजिटल साक्ष्यों, ऑनलाइन गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की पहचान करने में जुटी है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म का बढ़ता दुरुपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नई चुनौती बनकर उभरा है। ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी, साइबर सुरक्षा को मजबूत करना और लोगों में जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है।

यह मामला इस बात का संकेत है कि आतंकवाद अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इंटरनेट और डिजिटल तकनीक के जरिए भी अपना नेटवर्क फैलाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां पारंपरिक जांच के साथ-साथ साइबर इंटेलिजेंस और डिजिटल फॉरेंसिक पर भी विशेष ध्यान दे रही हैं।