अभिषेक मिश्रा, चंद्रोदय मंदिर
—————————-
नौका विहार करते श्रीश्री गौर निताई पर किया भक्तों ने पुष्प वर्षा
आम के फलों से निर्मित कुंज ने मोहा भक्तों का मन
वृन्दावन। गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय की गौरवशाली परंपरा के अंतर्गत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर मनाए जाने वाले पवित्र पानीहाटी चिउड़ा-दही महामहोत्सव के उपलक्ष्य में स्वामी भक्ति वेदांत मार्ग स्थित वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में आज दंड महोत्सव अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और भक्ति-भाव के साथ संपन्न हुआ। इस दिव्य आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति की।

प्रातःकालीन मंगल आरती के साथ प्रारंभ हुए इस भव्य महोत्सव में भगवान श्री राधा-वृंदावन चंद्र की धूप आरती, नवीन श्रृंगार, छप्पन भोग, भव्य पालकी उत्सव तथा विशेष आकर्षण के रूप में आमों से निर्मित अत्यंत दुर्लभ एवं मनमोहक विशेष कुंज ने भक्तों का मन मोह लिया। सुगंधित आमों एवं प्राकृतिक सौंदर्य से सुसज्जित इस दिव्य कुंज की भव्यता श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रही। भक्तों ने इसे अलौकिक एवं अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभूति बताया।

कार्यक्रम की श्रृंखला में संध्या बेला के दौरान मंदिर के भक्तों द्वारा नित्यानंद प्रभु एवं गौरांग महाप्रभु के श्रीविग्रह का अत्यंत भव्य पालकी उत्सव निकाला गया। हरिनाम संकीर्तन, मृदंग एवं करताल की मंगलमयी ध्वनि के बीच भक्तों ने पुष्पवर्षा करते हुए पूरे मंदिर परिसर को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
इसके उपरांत नित्यानंद एवं गौरांग महाप्रभु के श्रीविग्रह को मंदिर प्रांगण स्थित कल्याणी पर विराजित किया गया, जहां वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य दिव्य पुष्प महाभिषेक संपन्न हुआ। आकर्षक वस्त्रों एवं विशेष पुष्पमालाओं से सुसज्जित विग्रहों की छटा देखते ही बन रही थी।
प्रख्यात भागवताचार्य श्री इन्द्रेश महाराज जी ने ली श्री कृष्ण जन्मभूमि को मुक्त कराने की ली शपथ
महोत्सव का सबसे मनोहारी दृश्य तब देखने को मिला जब नित्यानंद एवं गौरांग महाप्रभु का दिव्य नौका विहार आयोजित किया गया। जलराशि के मध्य पुष्पों से सुसज्जित नौका जब मंद गति से आगे बढ़ी तो वातावरण हरिनाम संकीर्तन की मधुर तरंगों से गुंजायमान हो उठा। दीपों की झिलमिलाहट, पुष्पों की सुगंध और भक्तों की भावपूर्ण उपस्थिति ने ऐसा आध्यात्मिक दृश्य निर्मित किया मानो स्वयं भक्ति और प्रेम की धारा कल्याणी के जल पर अवतरित हो गई हो। श्रद्धालु प्रभु के दर्शन कर भावविभोर होते दिखाई दिए तथा पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
महोत्सव के अंतिम चरण में नित्यानंद एवं गौरांग महाप्रभु की महाआरती संपन्न हुई, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। तत्पश्चात श्रद्धालुओं को विशेष रूप से निर्मित पवित्र दही-चिउड़ा प्रसाद वितरित किया गया।
इस अवसर पर चंद्रोदय मंदिर के अध्यक्ष चंचलापति दास ने कहा, पानीहाटी दही-चिउड़ा महोत्सव केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और सेवा भावना का जीवंत संदेश है। इस प्रकार के दिव्य आयोजन मानव जीवन को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ते हैं तथा भगवान के प्रति निष्काम भक्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं। आज आमों से निर्मित विशेष कुंज एवं नौका विहार के माध्यम से भक्तों को एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करने का प्रयास किया गया है।
देश-विदेश सहित भारत के विभिन्न राज्यों के श्रद्धालुओं ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से इस भव्य उत्सव का आनंद प्राप्त किया। पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के रंगों में सराबोर दिखाई दिया।








