पापा, मैं जिंदगी की जंग हार गई हूं…” — आखिरी संदेश छोड़ गई नंदिनी

 

राजकोट। महज 21 साल की उम्र में राजनीति और जीवन में पहचान बनाने का सपना देखने वाली नंदिनी बोसमिया अब इस दुनिया में नहीं है। लेकिन मौत से पहले सोशल मीडिया पर लिखे उसके शब्द— “पापा, मैं जिंदगी की जंग हार गई हूं” — हर किसी को झकझोर रहे हैं।

राजकोट के आगमन सिटी इलाके में किराए के मकान में रहने वाली नंदिनी ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद सामने आए आरोपों ने पूरे मामले को और सनसनीखेज बना दिया है। मृतका के परिजनों ने उसके लिव-इन पार्टनर असलम और उसके परिवार पर मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं।

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परिवार का कहना है कि नंदिनी जूनागढ़ निवासी असलम के साथ पिछले कई महीनों से रह रही थी। असलम पहले से शादीशुदा है और एक बच्चे का पिता भी है। रिश्ते को लेकर दोनों परिवारों में लंबे समय से विवाद चल रहा था। नंदिनी के पिता का आरोप है कि उनकी बेटी को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था, जिसके चलते वह मानसिक रूप से टूट गई।

मामले में नया मोड़ तब आया जब नंदिनी की बहन रूपल ने दावा किया कि असलम ने उसे यह कहकर बहलाया कि उसे और संतान नहीं चाहिए, जिसके बाद कथित रूप से नंदिनी का गर्भाशय निकलवा दिया गया। हालांकि इस आरोप की अभी पुलिस या मेडिकल स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है।

बताया जा रहा है कि नंदिनी पिछले कुछ समय से असलम से अलग होकर नई जिंदगी शुरू करना चाहती थी। वह नौकरी कर स्वतंत्र रूप से रहने की योजना बना रही थी। लेकिन उससे पहले ही उसकी जिंदगी का दर्दनाक अंत हो गया।

वर्ष 2025 में आम आदमी पार्टी के टिकट पर नगरपालिका चुनाव लड़ चुकी नंदिनी की मौत अब केवल एक आत्महत्या का मामला नहीं रह गई है। पुलिस मोबाइल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया संदेशों और परिजनों के बयानों के आधार पर पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। सवाल यह है कि आखिर एक युवा लड़की को ऐसी कौन-सी परिस्थितियों ने घेर लिया कि उसने जिंदगी से हार मान ली।