स्वास्थ्य के दुश्मन आज भी जिंदा!

 

मनोज चौधरी मथुरा 

_______________________________अचार फैक्ट्री में मिला सड़ता कच्चा माल, मंदिर क्षेत्रों में बिक रहा था दूषित पेड़ा; खाद्य विभाग की कार्रवाई में खुली पोल

फैक्ट्री में पशुओं के चारे की तरह भरा अचार

मथुरा। भगवान की नगरी मथुरा में श्रद्धालुओं और आम लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले “स्वास्थ्य के दुश्मन” आज भी बेखौफ सक्रिय हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग की ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर लोगों की थाली और प्रसाद तक पहुंचने वाले खाद्य पदार्थ कितने सुरक्षित हैं?

खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने विशेष अभियान के तहत जब विभिन्न प्रतिष्ठानों और फैक्ट्रियों पर छापेमारी की तो चौंकाने वाले हालात सामने आए। सौंख रोड स्थित एक अचार निर्माण इकाई में अस्वस्थ एवं अत्यंत अस्वच्छ परिस्थितियों में अचार तैयार करने की सामग्री भंडारित मिली। विभाग ने मौके पर ही लगभग 600 किलोग्राम संदिग्ध और खराब कच्चा माल, जिसकी कीमत करीब 90 हजार रुपये बताई गई है, नष्ट करा दिया।

श्री कृष्ण जन्मभूमि को कब्जा मुक्त कराने के लिए पचास लाख लोगों के समक्ष वृंदावन के प्रख्यात भागवताचार्य श्री इन्द्रेश जी महाराज ने क्या ली शपथ।

कार्रवाई यहीं नहीं रुकी। बांके बिहारी मंदिर क्षेत्र में बिक रहे पेड़ों की जांच के दौरान करीब 50 किलोग्राम दूषित पेड़ा भी नष्ट कराया गया। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस प्रसाद की गुणवत्ता पर उठे सवालों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। वहीं गोवर्धन के दानघाटी क्षेत्र से भी पेड़ों के नमूने लिए गए हैं।

खाद्य विभाग ने गौर सेंटर इंडस्ट्रियल एरिया स्थित इकाई से टोमेटो सॉस, ग्रीन चिली सॉस, कुलिनरी सॉस और टोमेटो केचप के नमूने लिए, जबकि कोसीकलां की एक फैक्ट्री से मिक्स अचार का नमूना संग्रहित किया गया। कुल 12 नमूने जांच के लिए राजकीय खाद्य प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि विभागीय कार्रवाई में इतनी मात्रा में दूषित खाद्य सामग्री और अस्वच्छ उत्पादन व्यवस्था सामने आ रही है, तो अब तक यह सामान कितने लोगों की थाली तक पहुंच चुका होगा? आखिर नियमित निगरानी के बावजूद ऐसे कारोबारी लोगों की सेहत को खतरे में डालने का साहस कैसे जुटा लेते हैं?

सहायक आयुक्त (खाद्य) धीरेन्द्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम शामिल रही। विभाग का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध विधिक कार्रवाई की जाएगी।

लेकिन आम जनता की मांग है कि केवल नमूने लेकर कार्रवाई की औपचारिकता पूरी करने के बजाय ऐसे लोगों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएं, ताकि मुनाफे के लिए लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों में कानून का भय पैदा हो सके।